गाजीपुर। जब जीवन के समक्ष चुनौती अधिक हो, जीवन में सहजता के बजाए संघर्ष अधिक हो फिर भी जीवन के प्रति सकारात्मकता बनी रहे, ऐसी सीख हमें प्रेमचंद से मिलती है। यह बातें डा. निरंजन कुमार यादव ने ज्योति वर्मा के लघु शोध प्रबंध जमा करने के पूर्व आयोजित मौखिकी पर कही। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग इस बार कार्यक्रम को ऑनलाइन कर रहा है। ज्योति वर्मा ने अपने लघु शोध के विषय ‘प्रेमचंद को कैसे पढ़ें, एक अनुशीलन’ पर अध्यायवार अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रेमचंद का पूरा व्यक्तित्व ही औपनिवेशिक शासन में एक आम भारतीय का व्यक्तित्व है। कहा कि उस काल के अन्य साधारणजनों से जरा भी अलग नहीं है। अगर अमृतराय के शब्दों में कहें, तो प्रेमचंद की सरलता सहज है। साधारण जन समूह के बीच आ पड़ने पर सबका हाल-चाल, नाम- गांव पूछने वाला, कोई हंसी की बात उठने पर जोरदार ठहाका लगाने वाला और अपने को कलम का मजदूर मानने वाला यह आदमी हिंदी का महान उपन्यासकार प्रेमचंद था। स्वामी सहजानंद पीजी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रमोद कुमार ने कहा कि ज्योति ने लघु शोध की परिधि को बेहतर ढंग से स्पर्श किया है। डा. संगीता मौर्य ने ज्योति वर्मा के कार्य की सराहना की।