विवाह के मंडप में मंत्रोच्चारण के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेने के बाद हंसी-खुशी ससुराल के लिए विदा हुई अंजू महज चंद घंटे की ही दुल्हन बन कर रह गई। वजह ससुराल पहुंचने से पहले ही मायके से करीब 25 किमी दूर नोनहरा थाना क्षेत्र के महेशपुर चट्टी के पास हुए सड़क हादसे में उसका पति साथ छोड़कर सदा-सदा के लिए इस दुनिया से चल बसा। आगे चलकर चाहे जो भी हो, लेकिन हादसे का दर्द वह जिंदगी भर भूल नहीं पाएगी।
मुहम्मदाबाद के डोमनपुरा बालापुर गांव निवासी श्रीकृष्ण शरण मुन्ना खरवार वाराणसी में ही रहकर गाड़ी चलाता है और परिवार सहित वहीं पर रहता भी है। उसकी दो पुत्रियों में अंजू सबसे बड़ी और संजू छोटी है। अंजू की शादी के लिए पिता ने कासिमाबाद के रामगढ़ निवासी अवधू खरवार के पुत्र राधेश्याम खरवार जो बीएड कर एक निजी स्कूल में पढ़ाता था, को योग्य वर के रूप में चुना और शादी के लिए 14 मार्च का दिन तय किया।
शादी के लिए 15 दिन पूर्व अंजू अपने परिवारीजनों के साथ वाराणसी से अपने गांव बालापुर आई। इसके बाद घर में शादी की रस्मो-रिवाज शुरू हुई तो घर पर मेहमानों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया। ऐसे में घर में शादी की खुशियां छा गईं। बीते शनिवार को वह शुभ घड़ी भी आ गई, जिसका इंतजार दुल्हन अंजू के साथ परिवारीजनों को वर्षों से था। रात में दूल्हा राधेश्याम बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचा।
कन्या पक्ष के लोगों ने दूल्हे की आरती उतारकर बारातियों की खूब आवभगत की। इसके बाद शादी की रस्में पूरी की गई। सुबह रविवार होने और खरमास लगने से पहले पंडितों ने विदाई की सलाह दी। इसके चलते भोर में करीब साढ़े चार बजे परछन के बाद दुल्हन की हंसीखुशी विदाई कर दी गई। पति के साथ कार में सवार हुई अंजू को क्या पता था कि ससुराल की चौखट नसीब होने से पहले उसका सुहाग उजड़ जाएगा।
हादसे में खुद घायल होने और पति को गंवाने के बाद अंजू पूरी तरह से बदहवाश है। इसको लेकर हर कोई आंसू बहाने को मजबूर था और ऊपर वाले को कोस रहा था कि भगवान ऐसा क्यों किया।