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अगलगी की घटना से बचाव के लिए नहीं कोई व्यवस्था

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गाजीपुर। जिला अस्पताल सहित सार्वजनिक स्थलों पर आग से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिले के मात्र 9 प्राइवेट नर्सिंग होम हैं जिन्होंने फायर विभाग से एनओसी लिया है। जबकि अन्य निजी अस्पताल आग एवं शार्ट सर्किट से पूरी तरह से असुरक्षित हैं। हालांकि ऐसे अस्पतालों और भीड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।
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लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में हुई अगलगी की घटना के बाद भी जिला प्रशासन इसको लेकर सर्तक नहीं दिख रहा है। जिला और महिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। साथ ही वार्डो में मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज भी होता है लेकिन इन दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में आग से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में अगर लखनऊ के केजीएमयू जैसी घटना जिला और महिला अस्पताल में घटित होती है तो एक बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है। यहीं नहीं सार्वजनिक भीड़ वाले स्थानों पर अगलगी की घटना से निपटने के लिए कोई उपकरण नहीं लगाए गए हैं। अगर देखा जाए तो जिले में दर्जनों से ऊपर की संख्या में निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं लेकिन इनमें से मात्र 9 निजी अस्पताल अगलगी की घटना से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इन अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी भी प्राप्त किया है। इन 9 प्राइवेट अस्पतालों को छोड़कर शेष प्राइवेट अस्पतालों में आग एवं शार्ट सर्किट से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं है। अग्निशमन विभाग की मानी जाए तो अभी तक जिले के सरकारी और प्राइवेट नर्सिंग होम तथा सार्वजनिक भीड़ वाले स्थानों पर कोई घटना नहीं हुई है। इसके बावजूद भी विभाग अपनी ओर से सर्तकता रखने के लिए आग से बचाव के लिए फायर उपकरण आदि जिला और महिला अस्पतालों में स्थापित करने के लिए पत्र के माध्यम से अवगत करा चुका है। इस संबंध में अग्निशमन अधिकारी विनोद रावत ने बताया कि अग्निकांड जैसी घटनाओं से निपटने के लिए फायर यंत्र लगवाने की बात कई बार अस्पतालों को पत्र भेजकर कही गई है। इसके बावजूद भी अभी तक अस्पतालों को इन संयत्रों से लैस नहीं किया गया है।
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