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ईओडब्लू ने औषधि क्रय के सभी अभिलेखों को किया तलब

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गाजीपुर। करीब एक दशक पहले स्वास्थ्य महकमा द्वारा दवाओं की खरीद और भुगतान के मामले में घोटाले की जांच कर रहे आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन उत्तर प्रदेश ने औषधि क्रय के सभी अभिलेखों को तलब किया है। गत 13 सितंबर 2017 को विभाग को भेजे गए पत्र में ईओडब्लू के एसपी ने स्वास्थ्य महकमे के तत्कालीन सीएमओ, दो चीफ फार्मासिस्ट और दो लिपिकों को भी लखनऊ बुलाया है। इससे पूरे विभाग में हड़कंप मचा गया है।
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आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी को बीते 13 सिंतबर को पत्र भेजा है। जिसमें कुशीनगर को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में वित्तीय वर्ष 2004-05 और 2005-06 में यूपीडीपीएल कंपनी की नकली दवा की खरीद करने की बात कही गई है। पत्र में मुख्य औषधि भंडार लखनऊ से स्वास्थ्य केंद्रों को आपूर्ति कर धोखाधड़ी कर वित्तीय अनियमितता की गई है। इसकी जांच जून 2017 में ही शुरू कर दी गई है। ईओडब्लू की तरफ से सीएमओ को जारी पत्र में बताया गया है कि 16 जून 2017 को विभागों से बिन्दुवार आख्या और संबंधित अभिलेख मांगी गई थी। लेकिन किसी जिले ने इसे उपलब्ध नहीं कराया। इसे संज्ञान में लेते हुए दोबारा स्वास्थ्य महकमे को तत्काल उन सभी बिन्दुओं की विस्तृत जानकारी और अभिलेख कार्यालय को ईओडब्लू कार्यालय लखनऊ भेजने को कहा गया है। उधर देखा जाए तो दो साल पहले एनआरएचएम घोटाले में भी दो साल पहले सीबीआई की टीम द्वारा विभाग के कई तत्कालीन सीएमओ, लिपिक और चीफ फार्मासिस्ट को तलब करने के साथ ही उनसे पूछताछ की थी।
कोट:
सीएमओ डा. जीसी मौर्य ने कहा कि दवा खरीद तथा भुगतान में हुई गड़बड़ी और ईओडब्लू की जांच के संबंध में अभी तक कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलते ही मांगी गई सूचना दी जाएगी।
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इनसेट:
वर्ष 2010-11 में हुए दवा खरीद की भी चल रही है जांच
गाजीपुर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2010-11 में नसबंदी में दवाइयों और उपकरण खरीद में हुए गोलमाल की जांच भी सीबीआई द्वारा की जा रही है। तत्कालीन सीएमओ डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह के समय में सीबीआई की टीम कई बार सीएमओ कार्यालय पहुंचकर संबंधित विभाग के लिपिक और फर्मासिस्टों से पूछताछ करने के साथ ही सभी अभिलेखों को साथ भी ले गई थी। सीबीआई ने स्वास्थ्य कर्मियों को कई बार दिल्ली बुलाकर पूछताछ भी की है।
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