कासिमाबाद। जिले के प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार को राज्यपाल की संस्तुति पर भले ही अवनति करते हुए सहायक अभियंता बना दिया गया है लेकिन सवाल है कि यह करवाई पिछले सात वर्षों में त्वरित क्यों नहीं की गई और की गई तो करोड़ों रुपये के घोटाले की रिकवरी कब और कैसे होगी। यह भी कार्रवाई तब की गई जब वह सेवानिवृत्त हो गए। जिले के प्रांतीय खंड एक लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार सात वर्ष पूर्व नवसृजित जिले अमेठी में अधिशासी अभियंता के पद पर रहते हुए कासिमाबाद विकासखंड के गंगौली के हुडंरही की एक कार्यदायी संस्था से मिलीभगत करके संस्था को 2012 सितंबर माह से 2013 जनवरी माह के मध्य बिना किसी बिल बाउचर के चार करोड़ 31 लाख आठ हजार 80 रुपये का भुगतान किया था। कार्यदायी संस्था ने भुगतान गौरीगंज स्थित स्टेट बैंक की शाखा से ले भी लिया। घोटाले की जांच जब 2013 में बैठी तो लोगों को लगा कि न्याय शीघ्र मिल जाएगा लेकिन यह जांच कछुआ गति से चलती तब पूरी हुई जब जितेंद्र कुमार कई जिलों में कार्य करते हुए 30 अप्रैल को गाजीपुर जिले से सेवानिवृत्त हुए। विभागीय सूत्रों बताते हैं कि 28 अक्तूबर 2015 को जितेंद्र कुमार को सहायक अभियंता के पद पर किए जाने की संस्तुति लोक निर्माण विभाग लखनऊ के मुख्य अभियंता द्वारा निलंबित करते हुए कर दी गई थी। इस संस्तुति के बाद 13 जनवरी 2017 को राज्य लोक सेवा अधिकरण ने मुख्य अभियंता लखनऊ द्वारा जारी आदेश को सही पाया तो इतने वर्षों तक कार्रवाई आखिर लटकी क्यों रही।