बाद में न्यायालय ने दी जमानत, किया रिहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। विशेष न्यायाधीश एससी / एसटी एक्ट अरविंद मिश्र की अदालत ने बुधवार को सादात के तत्कालीन थानाध्यक्ष और वर्तमान में क्राइम ब्रांच के प्रभारी रामाश्रय राय को फटकार लगाते हुए पांच घंटे कटघरे में खड़ा कर दिया। बाद में न्यायालय ने जमानत देने के साथ रिहा किया।
मालूम हो कि सादात थाना क्षेत्र के बुढ़नपुर गांव निवासी सतिया देवी ने बीते 13 सितंबर 2021 को न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था। पीड़िता ने बताया था कि उस के गांव के कैलाश राय, उनका पुत्र पवन राय और दुर्विजय राय थानाध्यक्ष रामाश्रय राय के शह पर उसके पट्टाशुदा जमीन पर लगे पिलर और शौचालय को नष्ट करते हुए फसल को भी बर्बाद कर दिया। वदिनी के मना करने पर भी नहीं माने और जाति सूचक शब्दों से अपमानित करते हुए गाली देते हुए जान से मारने की धमकी भी दी थी। न्यायालय ने वदिनी के बयान और गवाहों के बयान के आधार पर बीते चार दिसंबर 2021 को सभी आरोपियों को विचारण के लिए तलब किया था।
आरोपी कैलाश और उनके लड़कों ने अपनी जमानत करा लिया थी। जबकि थानाध्यक्ष रामाश्रय राय के विरुद्ध तीन सितंबर 2022 को गैर जमानती वारंट न्यायालय ने जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा था । जिसपर थाने द्वारा बताया गया कि रामाश्रय राय क्राइम ब्रांच में तैनात है, वहां से तामिला कराया जाए। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि रामाश्रय राय पुलिस अधिकारी हैं, जिससे गैर जमानती वारंट का तामिला नहीं हो रहा है, जो आपत्तिजनक है।
न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया था। तब जाकर रामाश्रय राय न्यायालय में हाजिर हुए। नियमित जमानत पर बहस हुई। उस दौरान वह पूरे दिन न्यायालय के अभिरक्षा में थे। देर शाम न्यायालय ने उनको जमानत पर रिहा किया।