सुहवल। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन जलस्तर की जानकारी ले रहा है। बाढ़ राहत केंद्रों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। कटानग्रस्त और बाढ़ प्रभावित रहे क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। शनिवार सुबह 10 बजे तक गंगा का जलस्तर 56.320 मीटर था जो दोपहर में 56.560 मीटर हो गया। पिछले चौबीस घंटे में करीब 1.34 मीटर जलस्तर बढ़ा है। ऐसे में बाढ़ की आशंका को लेकर लोग चिंतित हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से गंगा 6.545 मीटर नीचे है। केन्द्रीय जल आयोग की मानें तो शनिवार की सुबह से लेकर शाम तक जलस्तर में छह सेमी प्रति घंटे की वृद्धि दर्ज की गई है। जिला प्रशासन भी गंगा में एक बार फिर बढ़ाव होने से पूरी तरह से सतर्क है। वहीं पूर्व में गंगा का कहर झेल चुके तटवर्ती गांव के लोग भी अपने आशियाने को सुरक्षित जगहों पर ले जाने की तैयारी में जुट गये हैं। बाढ़ से ज्यादा नुकसान खेतों में बोए गये विभिन्न फसल, जानवरों के चारे के साथ ही तलहटियों में बनाए गये अस्थायी आशियाने को होती है। इसको लेकर तटवर्ती लोगों को काफी चिंता सता रही है। वहीं, जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ राहत केन्द्रों, शरण स्थलों पर नजर रखने और सतर्क रहने का निर्देश कर्मचारियों को दिया है। किसी भी आपात परिस्थितियों से सामना करने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। कटानग्रस्त क्षेत्रों और बाढ़ से अति प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य महकमे के साथ ही पशुपालन विभाग के चिकित्सकों को भी पूरी तरह से सतर्क है। जिला मुख्यालय पर बनाए गये बाढ़ नियंत्रण कक्ष, कंट्रोल रूम को फिर से चौबीसों घंटे सक्रिय बना दिया गया है। जो गंगा के बढ़ते जलस्तर पर पल-पल की सूचनाएं अपडेट करने में लगा है। इधर, बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षात्मक दृष्टि से नदी में नाव संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी है। जिले के विभिन्न प्रमुख घाटों धीरे-धीरे डूबने लगे हैं। वहीं, गंगा के जल स्तर के बढने को लेकर केन्द्रीय जल आयोग गाजीपुर के प्रभारी हसनैन ने बताया कि जलस्तर में हो रही वृद्धि आगे भी कई दिनों तक होने की संभावना है।