कासिमाबाद ब्लॉक के महाराणा प्रताप सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी में बोलतीं
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गंगौली। कासिमाबाद ब्लॉक के महाराणा प्रताप सभागार में रविवार को कामरेड इकबाल अहमद की सातवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सैय्यदा शादाब फातिमा ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किश्स। वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए गरीबों, मजदूरों और वंचितों के अधिकारों के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि कामरेड इकबाल अहमद ने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ समाजसेवा और शोषितों के अधिकारों की लड़ाई में समर्पित कर दिया। समतामूलक समाज की स्थापना उनका सपना था। उन्होंने क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को बड़ौरा कताई मिल के उद्घाटन के दौरान काला झंडा दिखाकर विरोध जताया था। पूर्वांचल कताई मिल के 28 मजदूरों के साथ उन्हें एक माह तक जिला जेल में भी रहना पड़ा था। उन्होंने बेघरों को काम दो, बेकारी भत्ता दो की मांग को लेकर लखनऊ में विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान घुड़सवार पुलिसकर्मियों की कार्रवाई में वह घायल हो गए थे। वर्ष 1965 में शेखनपुर में हरवाही-बेगारी प्रथा के खिलाफ आंदोलन कर मजदूरों को उनका अधिकार और मजदूरी दिलाई। वहीं, 1970 में रेंगा गांव में सरजू पांडेय के नेतृत्व में संघर्ष कर करीब 100 बीघा जंगल की जमीन पर गरीब यादव, राजभर सहित अन्य वंचित वर्गों को कब्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में दिव्यांगों और निर्धन व्यक्तियों को कंबल वितरित किया गया। इस मौके पर इरशाद अहमद, जनक कुशवाहा, डॉ. आरपी पांडेय, अनुराग सिंह, विजय शंकर राय आदि मौजूद रहे।