संचारी रोगों से बचाव के लिए चलाया जा रहा संचारी रोग नियंत्रण अभियान फाइलों तक ही सिमट कर रह गया है। अधिकांश गांवों में न तो लोगों को जागरूक किया जा रहा और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा का छिड़काव ही कराया गया। जुलाई के प्रथम सप्ताह में जिलाधिकारी ने योजना के तहत दिमागी बुखार और संचारी रोग की रोकथाम के लिए शहर से ग्रामीण इलाकों तक साफ-सफाई कराने के साथ ही जलभराव वाले इलाकों में एंटी लार्वा का छिड़काव कराए जाने का निर्देश दिया था। अभियान में पंचायती राज, पशुपालन, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण, कृषि एवं सिंचाई विभाग को सहयोग करना है। इसके लिए टास्क फोर्स का गठन भी कर दिया गया है। इसमें आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता 31 जुलाई तक घर-घर जाकर सफाई, कचरा निस्तारण, जल भराव न होने देने और मच्छरों से बचाव की लोगों को जानकारी देंगी। इस अभियान की असल हालत यह है कि अधिकांश गांवों में सफाई के लिए तैनात किए गए सफाई कर्मचारियों का पता ही नहीं है। अगर आते भी हैं तो ग्राम प्रधान के यहां हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। नतीजतन, अधिकांश गांवों में गंदगी का आलम है। जगह-जगह जल भराव और कूड़ा कचरा होने से संक्रामक रोग होने का खतरा मंडराने लगा है।