गाजीपुर/कासिमाबाद। घरों में चूल्हे ठंडे पड़े हैं। आंखों से लगातार बह रहे आंसू दर्द को बयां कर रहे हैं। जुबां पर सिर्फ दूर जा चुके लाल का नाम। नेपाल में रविवार को हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले चारों युवकों के घरों की यही हालत है। ढांढस देने वालों का भी कलेजा फटा जा रहा है। परिवार और परिजनों की चीत्कार सबको झकझोर रही है। इन युवकों के गांवों में ही नहीं, पूरे क्षेत्र में सोमवार को हर जगह बस नेपाल विमान हादसे की ही चर्चा होती रही।
आर्थिक रूप से कमजोर चकदरिया चकजैनब निवासी अनिल राजभर ने पिता के हाथों को मजबूत करने के लिए दो वर्ष पहले ही जनसेवा केंद्र का संचालन शुरू किया था। घर में हैं बिलखती-सिसकती मां सरस्वती देवी और आंसू बहाते-पोंछते भाई सुनील। सांत्वना के बोल सुन एक पल को इनकी रुलाई रुकती तो दूसरे ही पल दर्द दोगुना होकर फू ट पड़ता। मां अपने लाल की तस्वीर सीने से लगाकर उसकी एक झलक दिखवाने की लोगों से गुहार लगा रही थीं।
सोनू जायसवाल के गांव चकजैनब के मातमी सन्नाटे को उनके घर से निकल रही परिजनों की चीत्कार ही तोड़ रही है। पत्नी रागिनी जायसवाल रोते-रोते अब गुमसुम सी हो गई हैं। तीन वर्ष की बेटी अनामिका ही नहीं, छह वर्ष की आराध्या भी नहीं समझ पा रही है कि उसके पापा अब कभी नहीं आएंगे। बच्चों की निगाहें पिता को तलाश रही हैं। सात माह का जीवनदीप कभी मां को निहारता है तो कभी खुद रोने लगता है। रोते-रोते बेहोश हो रहीं सोनू की मां द्रौपदी देवी और पिता राजेंद्र जायसवाल समझ नहीं पा रहे दुखों का यह पहाड़ कैसे उठाएं?
मां को नहीं पता...उनका बेटा अब दुनिया में नहीं रहा
अलावलपुर अफ्गां निवासी विशाल शर्मा के पिता संतोष शर्मा नाइजीरिया से गांव के लिए रवाना हो चुके हैं। भाई विश्वजीत बार-बार अचेत हो रहे हैं। मां सरिता देवी को यह नहीं बताया गया है कि उनका लाल अब बस यादों में ही है। दरवाजे पर सन्नाटा है। विश्वजीत भी मां के सामने जाने से पहले अपने आंसू पोंछकर जा रहा हैं। धरवां गांव निवासी अभिषेक सिंह कुशवाहा की मौत ने गांव वालों को झकझोर दिया है। अभिषेक छोटे भाई अविनेश के साथ जनसेवा केंद्र चलाते थे। किसान पिता चंद्रमा कुशवाहा का बड़ा सहारा छिन गया। मां मानती देवी बिलखते-बिलखते बेहोश हो जा रही हैं।