पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना क्षेत्र में दम तोड़ रही है। छुट्टा गोवंश को पकड़कर आश्रय स्थलों तक पहुंचाए जाने के प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा दिए गए आदेश की क्षेत्र में हनक नहीं दिखाई दे रही है। नगर से लेकर गांव तक यह पशु घूम रहे हैं। छुट्टा पशुओं ने एक ओर नगर और बाजारों की सड़कों पर डेरा जमा रखा है, तो दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। वहीं अधिकारी कागजों पर छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चला रहे हैं।
मुख्य सचिव ने 31 दिसंबर को जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। इसमें एक जनवरी से लेकर 10 जनवरी तक अभियान चलाकर सभी छुट्टा गोवंशों को गो-आश्रय स्थल तक पहुंचाने का आदेश दिया गया था। हालांकि अधिकारियों की मानें तो यह अवधि अब 31 मार्च 2023 तक के लिए बढ़ा दी गई है। इसके अलावा जिलाधिकारी ने बीते सप्ताह जिला मुख्यालय पर आयोजित बैठक में छुट्टा पशुओं को सड़कों और खेतों में न दिखाई पड़ने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए थे। इसके बावजूद क्षेत्र में अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ने का निर्देश बेअसर साबित हो रहा है।
सैदपुर के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. शुक्ला सुनील कुमार ने सैदपुर नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से 100 छुट्टा पशुओं को पकड़ कर उन्हें गोशालाओं में भेजे जाने का दावा किया है। जबकि हकीकत यह है कि संबंधित विभाग द्वारा अभियान के तहत अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है। सैदपुर का नगर पंचायत क्षेत्र हो या आसपास के गांव, सभी जगहों पर सड़कों पर झुंड में बैठे या खेतों में फसलों को बर्बाद करते छुट्टे मवेशियों को बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। छुट्टे मवेशी जहां किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। वहीं सैदपुर कस्बा क्षेत्र के बाजार में दिन भर इनकी आवाजाही से जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है।
पशुओं के संरक्षण को लेकर प्रशासन चौकन्ना है। संबंधित मातहतों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे क्षेत्रों में भ्रमण कर निराश्रित गोवंशों को आश्रय केंद्रों तक पहुंचाएं। इसके लिए ईओ और खंड विकास अधिकारी को भी पत्र जारी कर दिया गया है। -पुष्पेंद्र पटेल, एसडीएम सैदपुर