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कर्फ्यू से मुरझा गया फूलों का कारोबार

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मौधा। पिछले वर्ष से आर्थिक तंगी झेल रहे फूल कारोबारियों को इस वर्ष भी संक्रमण के चलते मायूसी झेलनी पड़ रही है। कर्फ्यू में बिक्री बंद होने स इन दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई है। बिक्री में लगभग 80 फीसदी गिरावट आ गई है। इससे उनके जीविकोपार्जन में कठिनाई हो रही है। कोरोना कर्फ्यू के पहले औड़िहार के वराह धाम और सैदपुर नगर के लगभग आधा दर्जन मंदिरों के अलावा सिधौना एवं बिहारीगंज की सड़कों पर खूबसूरत फूलों से बनी मालाओं को बेचते कई दुकानदार नजर आ जाते थे लेकिन अब कर्फ्यू के चलते कारोबार बंद है।ऐसे में यह आजीविका संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। शादियों की सादगी और सीमित संख्या के चलते भी फूल-माला के व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कारोबारियों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। सूरज पाठक ने बताया कि संक्रमण में मंदिर बंद हो जाने से फूल कारोबार को तगड़ा झटका लगा है। शादियों की संख्या में कमी आने से भी व्यापार चौपट है। गोलू पाल ने बताया कि पिछले वर्ष से ही फूलों का व्यापार कम हो गया है। इस वर्ष भी संक्रमण के चलते शादी समारोहों के सारे आर्डर कैंसिल हो गए। चंदन ने बताया कि वाराणसी के थोक मंडी से फूल माला मंगाकर उन्हें बेचकर कारोबारी अपना गुजारा कर लेते थे लेकिन बिक्री न होने से अब किराए का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। दीपक ने कहा कि दो रुपये कीमत की माला की लगभग पांच सौ दुकानों में सप्लाई होती थी। इससे माली परिवार का भरण पोषण होता था। कर्फ्य से बाजार बंद और रोजगार ठप हो गया है।
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