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‘गोदान’ से कम महत्वपूर्ण नहीं ‘कर्मभूमि’ उपन्यास

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गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर एवं प्रेमचंद साहित्य संस्थान की ओर से ‘प्रेमचंद को कैसे पढ़ें’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें प्रेमचंद के उपान्यास कर्मभूमि को गोदान से कम महत्वपूर्ण नहीं बताया गया। वक्ता डॉ.प्रवीन यादव ने कहा कि कर्मभूमि उपन्यास भी गोदान से कम महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन इसको वह उपलब्धि और महत्व नहीं मिला जो गोदान को प्राप्त है। कर्मभूमि राष्ट्रीय आंदोलन के साथ ही साथ संपूर्ण भारतीय जनमानस को अपने में समेटे हुए है। केंद्र और हाशिए के लोगों के साथ-साथ अल्पसंख्यक और साधु सन्यासियों को भी इसकी कथा में पिरोया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं पारिवारिक समस्याओं को बहुत गहरे स्तर पर जाकर उठाया गया है। नई और पुरानी पीढ़ी के द्वंद् के साथ पात्रों के आंतरिक द्वंद् को भी बहुत ही मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पश्चाताप और हृदय परिवर्तन प्रेमचंद साहित्य की खूबी है। वह बुरे चरित्र को अच्छा बना देते हैं। अमरकांत, सलीम और काले खां ऐसे ही पात्र हैं। कुल मिलाकर कहें तो कर्मभूमि उपन्यास समाज की हर जकड़बंदी से मुक्ति के लिए लिखा गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निरंजन कुमार यादव तथा मीडिया प्रभारी शिवकुमार ने आभार जताया।
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