औड़िहार। दिन पर दिन बढ़ रहे प्रदूषण और जल का अधिक दोहन होने के कारण जिले का भूजल आर्सेनिक होता जा रहा है। इस प्रदूषित जल के उपयोग करने से जगह-जगह चर्म रोग यकृत, फेफड़े, गुर्दे, आंत, लीवर, मूत्राशय संक्रमण जैसी गंभीर जानलेवा बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। जल शोधन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के किनारे पढ़ने वाले गांव कस्बों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। नदियों में प्रदूषण अधिक आता है। इसका प्रभाव भूजल स्रोत पर पड़ता है जिससे जल आर्सेनिक हो जाता है। सैदपुर विकासखंड के डहन, नारायणपुर ककरही, कुसई खरौना, सिधौना, सूर्यभान चौक,गौरहट , तेतारपुर, जोहरगंज के अलावा मंझरिया गांव ज्यादा प्रभावित हैं। करंडा ब्लाक के रामपुर माझा, दीनापुर, दामोदरपुर, सिकंदरपुर, करकटपुर गांव का भूजल आर्सेनिक युक्त हो गया है। इन दोनों ब्लॉकों में नदियों के कछार वाले इलाकों में भूजल आर्सेनिक की मात्रा 52 से 100 पीपीपी आर्सेनिक पाई गई है। अब से डेढ़ वर्ष पूर्व जल निगम की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में सैदपुर नगर क्षेत्र के भूजल में आयरन एवं सोडियम की मात्रा अधिक पाई गई थी। शासन द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम जल शक्ति मिशन के माध्यम से जिले के प्रभावित क्षेत्रों में वर्ष में दो बार सर्वेक्षण कराया जाना है। जल के नमूने का परीक्षण लखनऊ में होगा। जबकि ऐसे हैंडपंपों और जल स्रोतों पर लाल निशान का संकेत देकर लोगों को इसके उपयोग से परहेज करना है। अधिशासी अधिकारी संतोष मिश्रा ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप भूजल के आर्सेनिक हो गए हैंडपंपों और अन्य जल की उपादेयता वाले संसाधनों का जलशक्ति मिशन के तहत शीघ्र ही सर्वेक्षण कराकर कारगर उपाय किया जाएगा।