मनिहारी। स्थानीय क्षेत्र के सराय गोकुल और हरदासपुर काशी गांव में शनिवार की देर शाम किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. डीपी सिंह ने बताया कि खेतों में जैविक कार्बन की मात्रा काफी कम है। अब यह मात्रा 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक ही रह गई है। खेतों की जैविक शक्ति और सूक्ष्म जीव विविधता में बेहद कमी होती जा रही है। ऐसे में जब मिट्टी अस्वस्थ हो रही है, तो पौधे अस्वस्थ होंगे ही। साथ ही मिट्टी का जैविक चरित्र भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिशत तक जैविक कार्बन की बढ़ोत्तरी से मिट्टी में प्रति एकड़ 25000 गैलन जल धारण की क्षमता बढ़ती है। साथ ही सूक्ष्म जीवों की ताकत से अन्य कई पोषक तत्व पौधों को मिलते हैं और रोगकारी जीवों का नाश होता है। डा. सुदर्शन मौर्य ने प्याज, लहसुन, परवल आदि सब्जियों के पौधों के रोगों और उनके जैविक तौर तरीकों द्वारा फसलों पर आने वाली लागत को कम करने और रोगों के निदान के बारे में विस्तार से बताया। किसानों को ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, बैसिलस जैसे सूक्ष्म जीवों से लाभ के विषय में विस्तार से बताया गया। डा. विवेक ने किसानों को ट्राइकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास से बीज शोधन का प्रायोगिक प्रदर्शन करके दिखाया गया। इस मौके पर सतीश सिंह, शशिकांत सिंह, योगेंद्र यादव, रणवीर सिंह, प्रवीण सिंह, गजेंद्र सिंह तथा सराय गोकुल के मुन्ना सिंह, सुभाष, राधेश्याम राजभर, मुन्ना यादव, चंद्रदेव, अवधेश कुशवाहा उपस्थित थे।