कैंसर रोगियों के लिए बाल दान करने वाली--अदिति कृष्ण। स्रोत- परिजन
गाजीपुर। कीमोथैरेपी के दौरान कैंसर मरीजों को सिर्फ शारीरिक पीड़ा ही नहीं झेलनी पड़ती, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पर भी गहरी चोट होती है। ऐसे समय में बाल दान किसी के लिए नई रोशनी और उम्मीद बन सकता है। ये कहना है स्टीमरघाट निवासी अदिति कृष्ण का। स्टीमरघाट की रहने वाली अदिति कृष्ण ने कैंसर रोगियों के लिए पहली बार अपना बाल दान किया है। उन्हें ये प्रेरणा बीएचयू में अध्ययन के दौरान एक कैंसर पीड़ित छात्र की दशा देखने के बाद मिली। बताया कि कीमोथेरेपी के चलते छात्र के शरीर के सारे बाल उड़ गए थे। इसके बाद उसने बाहर निकलना बंद कर दिया था। अदिति ने कहा उन्होंने महसूस किया कि कीमोथैरेपी के दौरान कैंसर मरीजों को सिर्फ शारीरिक पीड़ा ही नहीं झेलनी पड़ती, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पर भी गहरी चोट होती है। ऐसे समय में बाल दान किसी के लिए नई रोशनी और उम्मीद बन सकता है। अदिति कृष्ण इस समय दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है और साथ ही महिला एवं जेंडर स्टडीज में डिप्लोमा लिया है। वह हमेशा से सामाजिक कार्यों में गहरी रुचि रखती हैं। उनका मानना है कि शिक्षा का असली उद्देश्य समाज के लिए कुछ करना है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने केप विद कैंसर मदत ट्रस्ट, मंगल आनंद अस्पताल, मुंबई को अपना बाल दान किया है। यह संस्था कैंसर रोगियों के लिए विग तैयार कर उन्हें निशुल्क बांटती है। इससे कीमोथैरेपी से गुजर रहे मरीजों को आत्मविश्वास और हिम्मत मिलती है। उन्होंने कहा कि अगर समाज के लोग आगे आए और बाल दान करें तो हम मिलकर कैंसर मरीजों की जिंदगी को आसान और संबल से भर सकते हैं।