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राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का अभाव

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जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के अभाव के चलते विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक नहीं होने से पठन-पाठन का कार्य प्रभावित है। सहायक अध्यपकों से प्रधानाचर्य का कार्य लेकर विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इंटर के विद्यालय प्रधानाचार्यविहीन हैं जबकि शिक्षकों की संख्या सृजित पदों के सापेक्ष आधी है। हाईस्कूल स्तर पर एक या दो शिक्षकों के भरोसे कई स्कूल संचालित हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिले में राजकीय इंटर कालेजों की संख्या 12 है जिसमें एक बालक और 11 बालिका विद्यालय शामिल हैं। वहीं राजकीय हाईस्कूलों की संख्या कुल 16 है। राजकीय इंटर कालेजों में एक भी प्रधानाचार्य नहीं हैं। इनका कार्य प्रवक्ता या सहायक अध्यापक देख रहे हैं। शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन पर असर पड़ रहा है। राजकीय इंटर कालेजों में लगभग सौ पद प्रवक्ता के हैं लेकिन वर्तमान में यह संख्या पचास से भी कम है। ठीक यही स्थिति सहायक अध्यापकों का है। इनकी संख्या 150 तक होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में यह संख्या सिर्फ 60-70 के आस-पास है। अगर राजकीय हाईस्कूलों की स्थिति पर गौर करें तो इनकी हालत और खराब है। जिले में 16 हाई स्कूल है जिसमें से चार स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। इनका कार्य सहायक अध्यापक देख रहे हैं। दो स्कूलों का एकल परिचालन किया जा रहा हैं। शेष स्कूलों में दो या तीन शिक्षक हैं। इन शिक्षकों से सभी विषयों की पढ़ाई कराना संभव नहीं है। सबसे दयनीय स्थिति गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों की है जिसमें गिनती के स्कूलों में ही इन विषयों के शिक्षक उपलब्ध हैं। जबकि शेष स्कूलों में इनका अभाव है। राजकीय विद्यालयों में व्याप्त समस्याओ को लेकर सरकार भी गंभीर नहीं है। कम संसाधन में इन विद्यालयों को संचालित कराते रहने की उसकी मंशा नजर आ रही है। राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता रामअवतार यादव ने बताया कि संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील कुमार भड़ाना और महामंत्री रविभूषण यादव ने शीघ्र ही राजकीय विद्यालयों को पर्याप्त प्रधानाचार्य और शिक्षक उपलब्ध कराने की शासन से मांग की है।
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