करंडा। गंगा में डूबने से एक ही परिवार के दो लोगों की मौत की घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। मां की गोद तो पत्नी की मांग सूनी हो गई। बुआ और मां की पूजा के लिए चाचा के साथ वेदी बनाने गए इकलौते पुत्र ओम की मौत से गांव में कोहराम मच गया। वहीं मासूम पुत्र के सिर से पिता का साया उठने का दर्द परिजन ही नहीं गांव के लोगों के आंखों से गिर रहे आंसू से साफ दिखाई पड़ रहा था। देर शाम दोनों शवों का परिजनों ने चोचकपुर घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार में शांति, सुख एवं समृद्धि के साथ पुत्र दीर्घायु की मंगल कामना के लिए ओम गिरी की मां कुसुम छठ महापर्व की पूजा के लिए ननद ऊषा गिरी के साथ जुटी थी। घर की साफ-सफाई के साथ नहाय-खाए के साथ पूजा का शुभारंभ होना था। घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस इकलौते पुत्र ओम के लिए वह छठ महापर्व का व्रत शुरू करने जा रही है। वह गंगा में डूबने से हादसे का शिकार हो जाएगा। गंगा से ओम का शव निकलते ही मां कुसुम देवी, पिता संजय गिरी दहाड़े मारकर रोने लगे। वहां खड़े लोगों की आंख भी भर गई। इधर चचेरे भाई सुजीत गिरी का शव देखकर पूरा परिवार बिलख पड़ा। पत्नी रुकमणी देवी अपने छह माह के पुत्र को गोद में लेकर रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। पिता की गोद में खिलखिला उठने वाला मासूम को क्या पता था कि उसके सिर से पिता का साथ हमेशा के लिए उठ गया है। घटना की जानकारी होते ही रिश्तेदार ही नहीं क्षेत्र के लोगों की भीड़ दरवाजे पर जुट गई। महिलाओं की करुण वेदना को देखकर वहां मौजूद हर किसी के आंख भर जा रही थी। गांव के लोग किसी तरह परिजनों को सांत्वना देकर शांत कराने में जुटे रहे। देर शाम दोनों शवों का परिजनों ने चोचकपुर गंगा घाट पर एक साथ दाहसंस्कार कर दिया, जिसे देख ग्रामीणों का भी कलेजा कांप उठा।