गाजीपुर। दोपहर दो बजे के बाद से ही व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के सदस्य गंगा घाटों निकलने लगे थे। चार बजते-बजते घाटों पर तिल धरने तक की जगह नहीें थी। घाटों पर पहुंची व्रती महिलाओं ने सुपेली में फल, पान की पत्ती, सुपारी, नारियल, अगरौटा आदि पूजा संबंधित सामानों को लेकर गंगा घाटों पर पहुंची। इसके बाद वेदी को विधि-विधान से पूजा। सूर्यास्त से पहले व्रती महिलाओं ने गंगा में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया। शहर के कलेक्टर घाट, ददरीघाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट, चीतनाथ घाट, अंजही घाट, पोस्ताघाट, नवापुरा घाट, कोयलाघाट, पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार दोपहर से शाम से पहले ही व्रती महिलाओं का घाटों पर पहुंचने का क्रम शुरु हो गया। बड़कीधारा घाट, सुल्तानपुर घाट, बलुआ घाट, हरिहरपुर घाट, गौसपुर घाट पर भारी भीड़ उमड़ी। इसके अलावा महादेवा शिव मंदिर पर स्थित पोखरे, सीताराम का पोखरा तथा तथा हनुमानगंज स्थित पोखरे के अलावा मंगई नदी के तट पर भी पर्व की धूम रही। दुबिहा संवाददाता के अनुसार असावर, हरदासपुर, दुबिहा, नेवादा आदि गांव में डाला छठ का पर्व हर्षोल्लास मनाया गया। इसके अलावा करीमुद्दीनपुर, भांवरकोल, कासिमाबाद, नोनहरा, मतसा, जमानिया, गहमर, दिलदारनगर, सैदपुर, नंदगंज, जंगीपुर, बिरनो, मरदह, दुल्लहपुर, शादियाबाद, बहरियाबाद, जखनिया, देवकली, बहादुरगंज सहित अन्य ग्रामीणों क्षेत्रों में छठ का पर्व परंपरागत तरीके से मना।