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लाडले को याद कर आज भी भर आती है माता-पिता की आंखें

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कासिमाबाद(गाजीपुर)। अमर शहीद शशांक सिंह की दूसरी पुण्यतिथि गुरुवार को मनाई जाएगी। 22 नवंबर 2016 को जम्मू कश्मीर के माछिल सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की बैट टीम द्वारा छिप कर किए गए क्रूर एवं कायराना हमले में शहीद हुए थे। शशांक के साथ जिले के बद्धूपुर निवासी मनोज कुशवाहा एवं राजस्थान के प्रभु सिंह भी शहीद हुए थे। यह तीनों जांबाज सैनिक 19 राजपूत रेजीमेंट में राइफल मैन के पद पर तैनात थे। तीनों सैनिकों के शवों के साथ पाकिस्तानी सेना ने खिलवाड़ करते हुए अंग भंग किया था। शहीद शशांक सिंह कासिमाबाद थाना क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव के मूल निवासी थे। अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई हिमांशु सिंह सेना में तैनात हैं तो दूसरा भाई सुधांशु सिंह बेरोजगारी की हालत में घर पर है। पिता अरुण कुमार सिंह एवं माता कमलावती देवी की अपने लाडले को याद कर आंखें आज भी भर आती हैं। शहीद परिवार अपने लाडले के शहीद होने पर जहां मर्माहत है वहीं नसीरुद्दीनपुर गांव शहीद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर याद करेगा। शहीद शशांक की दूसरी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सांसद भरत सिंह, विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल, पूर्व मंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह के साथ जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित कई गणमान्य लोगों को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है। । शहीद शशांक सिंह के परिजन शहीद के नाम पर राजनेताओं की ओर से की गई घोषणाएं पूरा न होने से काफी दुखी एवं ठगा महसूस कर रहे हैं। शहीद शशांक का शव जब गांव नसीरुद्दीनपुर आया था उस समय श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हजारों लोगों के बीच कई मंत्री एवं नेताओं ने लंबी-चौड़ी घोषणाएं कर शहीद परिवार को सांत्वना दी थी लेकिन सभी घोषणाएं हवा हवाई साबित हुईं हैं। शहीद के पिता अरुण सिंह के अनुसार तत्कालीन महिला कल्याण राज्यमंत्री ने नसीरुद्दीनपुर ग्राम का नाम शहीद के नाम पर शशांकपुरम रखने का वादा किया था। इसी प्रकार मुख्य गेट निर्माण का वादा किया था। ऐसे ही कासिमाबाद चौक पर शहीद शशांक सिंह की प्रतिमा लगाने के साथ कासिमाबाद-कठवामोड़ मार्ग का नामकरण शहीद शशांक सिंह के नाम पर करने का वादा किया गया था। ये सभी वादे राज्य सरकार के साथ जिला प्रशासन को करना था। इसी प्रकार संचार-रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने केंद्र सरकार के सहयोग से गैस एजेंसी देने के साथ शहीद के छोटे भाई सुधांशु को केंद्र सरकार की मदद से नौकरी दिलवाने का वादा किया था जो अब तक पूरा नहीं हुआ। शहीद के पिता अरुण कुमार सिंह के अनुसार उस समय शहीद परिवार को दो बीघा जमीन कासिमाबाद में शहीद के नाम पर भव्य स्टेडियम निर्माण का आश्वासन दिया गया था। यह सभी आश्वासन शहीद के शहादत के दो वर्ष पूरे होने के बाद भी पूरे नहीं किए गए।
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