सुहवल। बिहार राज्य को जोड़ने वाला ताड़ीघाट-बारा मार्ग का निर्माण आखिर लटक ही गया। दो माह बीत गये लेकिन अभी तक शासन की ओर से शेष 38 करोड़ की धनराशि आंवटित नहीं हुई। साईंत बांध से मेदनीपुर तक करीब साढ़े सात किमी सड़क का निर्माण ठप हो गया है। गिट्टी कंकड़ और रेत के चलते इस सड़क पर चलना काफी दूभर हो गया है। काम कब शुरु होगा इस बारे में बताने के लिए कोई अधिकारी तैयार नहीं है। आचार संहिता लागू हो जाने के बाद तो रही सही आस भी चली गई है। नेशनल हाईवे घोषित होने के बाद ताड़ीघाट से बारा तक साढ़े अड़तीस किलोमीटर तक के इस मार्ग के निर्माण को मंजूरी मिल गई। यह काम 228 करोड़ रुपए में गत वर्ष अगस्त माह में ही पूरा किया जाना था। हालांकि इस सड़क की दशा भी बेहद दयनीय थी। वाहन से चलना तचो दूर पैदल भी इस मार्ग पर चलना किसी खतरें से खेलने के बराबर था। कई राजनीतिक उठा पटक को झेलने के बाद जब इस सड़क का काम शुरु हुआ तो इससे जुड़े सभी गांवों में उत्सव मना। लोगों को लगा कि अब वह नारकीय जीवन से निकलेंगे तथा विकास से जुड़ेंगे। करीब एकतीस किलोमीटर तक का काम खूब जोर शोर से हुआ। मजबूती से हो रहे काम को देख कर आस पास के लोग संतुष्ट भी थे। इसी बीच साईंतबांध से लेकर मेदनीपुर तक करीब साढ़े सात किमी का निर्माण कार्य ठप पड़ गया। इसका कारण यह था कि अभी 38 करोड़ की राशि का आवंटन नहीं किया गया। कार्यदायी संस्था ने काम रुकने से पहले कई बार शासन प्रशासन को पत्र लिखा लेकिन बजट नहीं आया। धीरे-धीरे कार्यदायी संस्थान के प्लांट में सन्नाटा छा गया। अधिकारी, इंजीनियर, मजदूर आदि अपने घरों को चले गये। अत्याधुनिक मशीनें मार्ग के किनारे खड़ी हो कर शोभा बनी है। निर्माण कार्य शुरु होने की आस लगाए लोगों को उस समय और निराशा हो गई जब आचार संहिता लागू हो गई। हालांकि इस काम के लिए बजट जारी किया जा सकता है लेकिन वास्तविक पेंच कहां फंसा है इस बात की जानकारी किसी को ठीक से नहीं है। लोक निर्माण खंड प्रथम के अधिशासी अभियन्ता प्रदीप कुमार शरद ने बताया कि धनराशि के आवंटन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। बजट आते ही निर्माण कार्य तुरंत प्रारंभ करा दिया जाएगा।