गाजीपुर। कड़ाके की ठंड के बीच शनिवार को सूर्यदेव ने अपनी चमक बिखेरी। इससे ठंड का तेवर कुछ नर्म हुआ। धूप निकलने ही ठंड से परेशान लोगों का चेहरा खुशी से खिल उठा। जिसे जहां भी धूप मिला, वह उसका आनंद लेने में जुट गया। गृहणियों ने खुद धूप सेंकने के साथ ही बिस्तर और कपड़ों को भी धूप दिखाया। हालांकि धूप गलन का जबरदस्त प्रभाव बना रहा। धूप में तो ठंड से राहत मिल रही है, लेकिन छाव में आते ही पुन: शरीर ठंड से कंपकंपाने लग रहा था। वैसे को दिसंबर माह की शुरुआत से ही ठंड का प्रभाव शुरु हो गया था। करीब दस दिन पहले अचानक जबरदस्त कोहरा का प्रभाव शुरु हो गया। इससे ठंड में भी जबरदस्त इजाफा हो गया था। पिछले कई दिनों से सूर्यदेव पर मौसम का ग्रहण लगा हुआ था। धूप न मिलने से ठंड से आम जन-जीवन पूरी तरह से बेहाल था। ठंड से राहत के लिए लोग गर्म कपड़ों के साथ ही अलाव का सहारा ले रहे थे। जब तक लोग अलाव के पास बैठ रहे थे, तब तक तो ठंड से राहत मिल रही थी, लेकिन अलाव के पास से हटते ही पुन: लोग कांपने लग रहे थे। बेहाल लोगों की जुबान पर यही बात थी कि जब तक कड़ाके की धूप नहीं निकलेगी, तब तक ठंड का तेवर कम नहीं होगा। इसी क्रम में शनिवार की सुबह नौ बजे ही सूर्यदेव ने आंखे खोल दी। इससे लोगों के चेहरे की चमक भी इस बात से बढ़ गई कि चलो धूप के सहारे ठंड से कुछ राहत मिलेगी। जिसे जहां धूप मिला, वहीं बैठकर उसका आनंद लेने में जुट गया। विकास भवन सहित अन्य कार्यालयों के परिसरों और छतों पर कर्मचारियों के साथ ही अन्य लोग धूप सेकते नजर आए। मौसम साफ होने से गृहणियां भी प्रसन्न हो गई। वह घर का काम-काज निपटाने के बाद छतों पर पहुंच गई। बिस्तर-कपड़ों को धूप दिखाने के साथ ही खुद धूप का आनंद लेकर ठंड से राहत पाया। हालांकि गलन पूरी तरह से हावी रही। धूप के बीच रहने पर तो सर्दी से काफी राहत मिल रही है, लेकिन धूप से हटने ही गलन से कंपकंपी होने लग रही थी। शाम ढलते ही पुन: ठंड हावी हो गई। इससे राहत के लिए लोगों ने अलाव का सहारा लेना शुरु कर दिया। मौसम के मिजाज को लेकर लोगों में यह चर्चा होती रही कि खिचड़ी बाद ही ठंड का तेवर नर्म होगा।