शवों के दाह संस्कार के लिए दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के लोगों को जनपद मुख्यालय स्थित श्मशान स्थल आना पड़ता है। ऐसे में नगर पालिका और नगर पंचायतों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में नदियों के किनारे अंत्येष्टि स्थल का निर्माण होना है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए आठ अंत्येष्टि स्थल निर्माण का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब तक गांव का चयन तक नहीं हो सका है। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र चार माह शेष रह गए हैं। यहीं नहीं वित्तीय वर्ष 2021-2022 में निर्माणाधीन छह अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हो सका है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में आठ अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया जाना था, जिससे पूर्ण करा लिया गया। लेकिन वित्तीय वर्ष 2021-22 में छह का निर्माण कार्य अब तक आधा-अधूरा ही है। ऐसे में उस ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शवों का दाह संस्कार करने के लिए जनपद मुख्यालय स्थित श्मशान स्थल ही आना पड़ता है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2022-2023 में पुन: शासन की ओर से आठ का लक्ष्य भेजा गया, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक निर्माण कार्य शुरू कराना तो दूर गांवों का ही चयन नहीं हो सका है।
करीब 24.12 लाख रुपये में प्रत्येक अंत्येष्टि स्थल पर शौचालय, स्नानघर, बैठने के लिए सीमेंट के बैंच, हैंडपंप, शवदाह के लिए टीन शेड लगे चबूतरे का निर्माण, इंटरलाकिंग सड़क एवं प्रकाश की व्यवस्था शामिल है। जिससे वहां शव दाह के लिए आने वाले लोगों को दिक्कत का सामना न कर पड़े, लेकिन कार्य की गति धीमी होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस संबंध में डीपीआरओ अंशुल मौर्या ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-2023 में मिले लक्ष्य के अनुसार जल्द ही चयन के साथ निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। वहीं वित्तीय वर्ष 2021- 22 में आपूर्ण अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कार्य भी जल्द से जल्द पूर्ण करा लिया जाएगा।