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रमजान का दूसरा असरा शुरू..

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गाजीपुर,बारा। रमजानुल मुबारक का पहला यानी रहमत का असरा खत्म और दूसरा असरा शुरू हो चुका है। दूसरा असरा बरकत (आशीष) का है, जिसमें अल्लाह पाक अपने नेमतों में बेशुमार बरकत अता फरामते हैं। इस असरे में अल्लाह के बंदे अल्लाह की नेमतों को दिल खोलकर खर्च करते हैं, जिससे नादारों, मजबूरों, गरीबों, यतीमों, बेकशों और बेसहारों की जरूरतें पूरी होती हैं। रोजेदार रमजानुल मुबारक का एक-एक क्षण अल्लाह की इबादत के हवाले कर देते हैं और वह सुबह से शाम तक रब्बे कायनात को राजी करने में मशगूल रहते है। उनका खाना-पीना, उठाना-बैठना, सोना-जगना हर अमल (कार्य) अपने रब्ब की खुश्नोदी हासिल करने के लिए होता है, जो अल्लाह पाक को बेहद पसंद है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए लोग इस असरे में ज्यादा से ज्यादा माल अल्लाह की रह में खर्च करते है। अपनी रहमत से अल्लाह पाक अपने उन नेक बंदों के माल में इजाफा कर देता है। अल्लाह पाक को रियाकारी और दिखावा पसंद नहीं है। जो लोग दिखावे के लिए खर्च करते हैं, उन्हें अल्लाह पसंद नहीं करता। ऐसे लोगों का हर अमल बर्बाद हो जाता है। अल्लाह पाक अपने उन बंदों से बेहद खुश होता है, जो अपने रब्ब की रजा के लिए अपना सारा कार्य करते है, उनका कोई काम दिखावे के लिए नहीं होता है।
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