सेवराई/दिलदारनगर। अपने सेवा काल के दौरान कई लड़ाइयों को करीब से देख चुके रिटायर फौजियों ने कहा कि अब सरकार को निर्णय लेने में देर नहीं करना चाहिए। अगर लड़ाई छेड़ दी जाए तब भी इतने जवान शहीद नहीं होंगे और हम विजय प्राप्त कर लेंगे। पूर्व सैनिक हरेंद्र सिंह ने कहा कि आतंकियों से निपटने की एक ही भाषा है। इनको इनकी ही भाषा मे जवाब दिया जाए और देखते ही इनको गोली मार दी जाए। कारगिल लड़ाई के गवाह रहे अशोक सिंह ने कहा कि सैनिक तो लड़ाई का इंतजार करते है। मैं तो आज भी सीमा पर जाकर इनका जवाब देने को तैयार हूं। वीरेंद्र सिंह इस घटना को कायराना हमला करार देते हैं। इसी प्रकार जमुना सिंह ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं का जिम्मेदार राजनीतिक परिवेश भी है।