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आदर्श जीवन जीने की विधा का नाम रामचरित मानस

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सुहवल(गाजीपुर)। आदर्श जीवन जीने की विधा का नाम रामचरित मानस है। दुनिया में यही एक ऐसा ग्रंथ है जिससे व्यक्ति अपने जीवन की नैया पार लगा सकता है। यह विचार श्री मानस संघ सुहवल के तत्वावधान में आयोजित 49 वें तुलसी जयंती समारोह के उपलक्ष्य में महावीर मंदिर सुहवल पर आयोजित रामकथा में त्रिभुवन दास ने व्यक्त किया। मानस पर प्रवचन करते हुए रविंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि मानस तन, मन और सभी कष्ट निवारण का मंत्र है। उन्होंने मानस संघ के इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि वह श्रद्धालु धन्य हैं जिनको हनुमान और मानस का दर्शन होता है। मानस के सातो सोपान जीवन के सात चरण हैं। एक सफल एव देशभक्त नागरिक बनने के लिए मानस का अध्ययन जरूरी है। इस मौके पर मृत्युंजय मिश्र, भगवती प्रसाद तिवारी, पृथ्वीनाथ पांडेय, श्याम नारायण पांडेय, छोटेलाल, जवाहिर कुशवाहा, श्रवण राय, रतन गुप्ता, राम अवतार यादव, लल्लन गुप्ता, पवन कुमार राय, हरी कुशवाहा आदि उपस्थित थे।
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