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अस्तित्व खो रहा सरैला का जच्चा-बच्चा केंद्र

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दिलदारनगर(गाजीपुर)। क्षेत्र के सरैला गांव में जच्चा-बच्चा केंद्र का लाभ महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। इसका भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। जिससे इसका अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। भवन के मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। यहां तैनात एएनएम भी सरैला में न रहकर दिलदारनगर में ही रहती हैं। केंद्र पर सुविधाओं के अभाव में मरीज तथा गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। जहां गरीब असहाय महिलाओं का आर्थिक शोषण किया जाता है। गांव की महिलाओं को सरकारी अस्पताल का सहारा लेने के लिए दस किलोमीटर दूर भदौरा जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जच्चा-बच्चा केंद्र के भवन की मरम्मत करा कर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल किया जाय। सरैला के जच्चा-बच्चा केंद्र का भवन काफी क्षतिग्रस्त हो गया है। दरवाजे, खिड़कियां टूट गई हैं तथा दीवारों में दरार पड़ गया है। परिसर में चारों तरफ झाड़ियां उग गई हैं। झाड़ियों की वजह से वहां जहरीले जीव जंतुओं ने अड्डा बना लिया है, जिससे वहां आने जाने में भी भय महसूस होता है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जच्चा बच्चा केंद्र भवन का निर्माण कराकर इसे सुचारू रूप से नहीं चलाया गया तो गांव के लोग सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। विभाग से लेकर जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते लोगों में गुस्सा बढ़ने लगा है। गांव के ही शकील, एजाज खां, हृदय नारायण, रियाज खां, जावेद, गुड्डु, रमेश राम का कहना है कि वर्षों से जच्चा-बच्चा केंद्र का भवन क्षतिग्रस्त हो चुका है। महिलाओं को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा के प्रभारी डॉ. रवि रंजन ने बताया कि गांव की महिलाओं की स्वास्थ्य के उपचार व टीकाकरण के लिए एएनएम डॉ. संगीता यादव की नियुक्ति की गई है। वह रोजाना सरैला जाती हैं। भवन के निर्माण के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।
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