गाजीपुर। प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए शासन की ओर से जिले को इस बार 19600 को साक्षर बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके सापेक्ष 20523 असाक्षरों को चिह्नित किया गया है। इसके लिए 2316 वालंटियर चयनित किए गए हैं। 10 निरक्षरों पर एक वालंटियर का चयन किया गया है। पोर्टल पर इनकी फीडिंग कर दी गई है। प्रदेश में 15 वर्ष से ऊपर आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए एक अप्रैल 2022 से अभियान चल रहा है, जो 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगा। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपना नाम भी नहीं लिख और पढ़ सकता है, तो उसे असाक्षर माना जाता है। इस अभियान में ''अक्षर साथियों'' (वालंटियर्स) की मदद से केंद्रों में 200 घंटे की कक्षाएं दी जानी है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों की पहचान और सर्वे का कार्य अब शिक्षकों के बजाए शिक्षामित्रों की ओर से किया जाएगा। इनकी परीक्षा मार्च महीने में होगी। अभियान के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान असाक्षरों को 200 घंटे का अध्यापन कराकर पढ़ना, लिखना और अंकगणित सिखाना है। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अमित कुमार राय ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से निर्देश दिया गया है कि पहले असाक्षरों और वालंटियरों का सर्वे स्कूलों के अध्यापकों के माध्यम से कराया जा रहा था। अब यह सर्वे शिक्षामित्रों की जिम्मेदारी होगी। प्रधानाध्यापक इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।