फास्ट ट्रैक कोर्ट पाक्सो विशेष न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत ने बृहस्पतिवार को मरदह थाना के एक सरकारी विद्यालय में एक वर्ष पूर्व कक्षा सात की छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में दुराचारी को 20 वर्ष की सश्रम कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर सजा छह माह और भुगतनी होगी।
सरकारी अधिवक्ता अनुज राय ने बताया कि न्यायालय ने दुराचारी को दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सश्रम कारावास एवं दस हजार अर्थदंड और पाक्सो मामले में 20 वर्ष की सजा और 10 हजार अर्थदंड लगाया है। उन्होंने बताया कि एक साल पूर्व तत्कालीन खंड शिक्षाधिकारी मरदह कल्पना के निजी चालक मुन्ना उर्फ डब्लू ने आठ अक्तूबर 2021 को एक विद्यालय के कक्षा सात की छात्रा के साथ विद्यालय बंद होने के बाद दुष्कर्म किया था। उस दिन खंड शिक्षाधिकारी ने सुबह विद्यालयों का निरीक्षण किया था। दोपहर बाद चालक को कार्यालय में छोड़कर बाहर चली गई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार जेल भेज दिया था।
वहीं तत्कालीन खंड शिक्षाधिकारी कल्पना पर विभागीय कार्रवाई करके स्थानांतरण कर दिया गया था। चालक को तत्कालीन खंड शिक्षाधिकारी का संरक्षण प्राप्त था। चालक कक्षाओं में जाकर छात्राओं की फोटो खींचता था और अक्सर छेड़खानी भी करता था। शिक्षकों द्वारा आपत्ति किए जाने पर वह चालक शिक्षकों को डांट दिया करता था। बाद में शिक्षकों से वसूली भी करने लगा था।
इसकी शिकायत शिक्षक प्रतिनिधियों तक पहुंची तो तत्कालीन बीईओ के चालक के बारे में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा इस मामले को मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री के आदेश पर जिलाधिकारी द्वारा जांच कराई गई। दोषी पाए जाने पर तत्कालीन जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह द्वारा तत्कालीन बीईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भी लिखा गया था।
उच्च न्यायालय में फौजदारी निगरानी प्रस्तुत
सरकारी अधिवक्ता अनुज राय ने बताया कि स्थानीय पुलिस द्वारा बीईओ के प्रभाव में अन्य मामले की लीपापोती करने पर दुष्कर्म पीड़िता के पिता द्वारा उच्च न्यायालय में फौजदारी निगरानी प्रस्तुत किया गया है, जो विचाराधीन है।
दो शिक्षकों का मामला कोर्ट में विचाराधीन
सरकारी अधिवक्ता अनुज राय ने बताया कि तत्कालीन बीईओ कल्पना द्वारा दो शिक्षक प्रतिनिधियों अनंत सिंह एवं दुर्गेश सिंह पर एससी/एसटी एवं महिला उत्पीड़न तहरीर देकर मरदह थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। यह मामला अभी जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।