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आज तक लंबित पड़ा हुआ है पदोन्नति के आरक्षण का बिल

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गाजीपुर। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें जो संवैधानिक अधिकार प्रदान किए थे, उसमें सबसे प्रमुख अधिकार प्रतिनिधित्व (आरक्षण) का अधिकार था, लेकिन उसे भी अब खत्म करने की साजिश चल रही है। इसमें पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया प्रमुख है। जिसे सरकार ने लोकसभा में इस बिल को 2012 से पास नहीं होने दिया। ये बातें अखिल भारतीय अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन की लंका स्थित रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित डा. अंबेडकर मिशन बढ़ाओ एवं आरक्षण बचाओ राष्ट्रीय महारैली को बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महासचिव बुद्धमित्र मुसाफिर ने कही। उन्होंने कहा कि हमें अपने संवैधैनिक अधिकारों के प्रति सर्तक हो जाना चाहिए, अन्यथा हमारे सारे अधिकारों को समाप्त कर दिया जाएगा। मुख्य वक्ता डा. राहुल राज ने कहा कि आरक्षण के हितों के संघर्ष का वक्त अब आ गया है। प्रांतीय अध्यक्ष अरुण कुमार प्रेमी ने संगठन की मजबूती पर बल दिया। प्रांतीय महासचिव बृजेश कुमार भारती ने कहा कि हमें एकजुट होकर आगे आना होगा। राष्ट्रीय उप महासचिव नीलम बौद्ध ने कहा कि आरक्षण कोई भीख नहीं है, यह हमारा मूल अधिकार है। डा. सरोज रानी ने कहा कि डा. अंबेडकर के आंदोलन में जब तक महिलाओं की भागीदारी नहीं होगी, तब तक बाबा साहब का मिशन पूरा नहीं हो सकता। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत भंते देवेशानंद एवं भंते शीलवचन द्वारा भगवान बुद्ध एवं डा. अंबेडकर की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्जवलित कर धम्म देशना से हुआ। उद्घाटन भाषण बाबा पी भोसले ने दिया। महारैली में डा. एमजी निगम, सुभावती, सुनीता जैसवार, अशोक कुमार प्रबुद्ध, जयप्रकाश बौद्ध, धनंजय, चंद्रिका प्रसाद, विरेंद्रप्रताप, सुदेश्वर बौद्ध, हरिशंकर भारती, राधेश्याम भारती, परदेशी बौद्ध, अनिकेत बौद्ध, दीपांकर बौद्ध, अजीत, संतोष भारती आदि ने विचार व्यक्त किया।
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