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मंत्रोच्चार की गूंज से समूचा अंचल गुंजायमान

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जखनियां। सिद्धपीठ हथियाराम में स्थापित मां भगवती के 108 अवतारों में से एक बुढ़िया माई एवं देवाधिदेव भगवान शिव के उपासक 26वें पीठाधीश्वर महंत महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति इन दिनों अपना 22वां चातुर्मास महायज्ञ संपादित कर रहे हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से आरंभ होकर भाद्रपद पूर्णिमा तक चलने वाले चातुर्मास महायज्ञ में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से शिष्य-श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। समूचे अंचल का माहौल भक्तिमय बना हुआ है। महायज्ञ में वाराणसी के वैदिक ब्राह्मण प्रतिदिन षोडष प्रकार विधि से पार्थिव शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर रहे हैं। एक साथ 21 ब्राह्मणों द्वारा किए जा रहे मंत्रोच्चार की गूंज से समूचा अंचल गुंजायमान है। स्वामी भवानीनंदन सिद्धपीठ की परंपरा का निर्वहन करते हुए मठ समेत सोमनाथ, मलिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओमकारेश्वर, केदारनाथ, भीमशंकर, विश्वेश्वर, त्रयंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घुषमेश्वर द्वादश ज्योर्तिलिंगों, नेपाल स्थित पशुपतिनाथ एवं अन्य तीर्थ स्थानों पर इस महायज्ञ का अनुष्ठान कर चुके हैं।
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