गाजीपुर। वेद बिहारी के पोखरा पर चल रहे यज्ञ को दौरान मानस कथा में शिवजी महाराज ने भारत की नारी वैदिक काल से चारित्रिक रूप से ,विद्वता के क्षेत्र में और राजनीतिक एवं धार्मिक क्षेत्र में भी अति महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। सीता जी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि रावण द्वारा हरण किये जाने के बावजूद उन्होंने असीम साहस एवं धैर्य का परिचय दिया। सीता ने धर्म, देश और पतिदेव के प्रति अटूट निष्ठा को बनाए रखा। रावण की तरफ जब सीता जी ने आंख उठा कर देखना भी गंवारा नहीं किया तो रावण का भी साहस नहीं हुआ कि वह सीता जी का रंच मात्र भी अहित कर पाए। आज के परिवेश में अपने शास्त्रों के साथ, संस्कृति के साथ और संस्कार एवं सभ्यता के साथ जुटने की आवश्यकता है। यदि ऐसा होना शुरू हो गया तो समाज में फैली हुई निशाचरी संस्कृति का समूल नाश होने से कोई रोक नहीं पाएगा । संत दयाराम दास ने कहा कि सत्य, न्याय, धर्म की स्थापना के बगैर समाज का हित होने वाला नहीं है इस लिए धर्म को अपना कर जीव को अपना जन्म को सुधारना चाहिए। इस मौके पर संत राहुल महाराज के अलावा अन्य संतों ने भी अपने विचार व्यक्त किया। यहां दूर दराज से आकर भक्त यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों तथा जयकारे से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। यज्ञ में रात को रामलीला का मंचन किया जा रहा है। मंच का संचालन जय प्रकाश दास ने किया।