मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव के बिचला शिवालय पर चल रहे श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन रविवार को भंडारे के साथ हो गया। व्यासपीठ से पंडित देव शास्त्री ने कहा कि धन की तीन गति है। सबसे उत्तम गति दान है। दान हमेशा शुद्ध हृदय से और पात्र व्यक्ति को करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता अतुलनीय है। गुरुकुल से बनी मित्रता को भगवान श्रीकृष्ण ने तब भी निभाया जब द्बारिकाधीश थे। अब के दौर में आर्थिक असमानता आते ही मित्र और मित्रता बदल जाती है। शुकदेवजी की कथा सुन राजा परीक्षित को वैराग्य हुआ और उन्होंने मोक्ष को प्राप्त किया। कथा पूर्ण होने के बाद श्रोताओं ने अंतिम दिन धूमधाम से कथावाचक की विदाई की। इस मौके पर कमलेश दूबे, संतोष प्रधान, रविशंकर, रामप्रवेश, श्याम सुंदर, सुरेश प्रधान, धनंजय राय, श्रीनिवास, बृजनारायण प्रधान आदि उपस्थित थे।