तहरीर के आधार पर 8 नामजद व 200 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना के बाद आठ लोगों सहित संजय वर्मा, लालजी गुप्ता, मोहन यादव, विवेक वर्मा, विमल वर्मा, नरेंद्र यादव व राजेन्द्र यादव के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय पेश किया गया। कुल 15 आरोपियो के विरुद्ध न्यायालय में विचारण के दौरान वरिष्ट अभियोजन अधिकारी प्रेमचंद द्वारा कुल सात गवाहों को पेश किया गया।
सभी गवाहों ने अपना अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। न्यायालय में दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद सभी आरोपियों को धारा 188 आइपीसी के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई। सजा के बाद अभियुक्तों की ओर से अपील अवधि तक जमानत पर रिहा करने के लिए आवेदन दिया गया जिसे न्यायालय द्वारा मंजूर करते हुए रिहा कर दिया गया।