परिषदीय स्कूलों के जिन बच्चों का आधार प्रमाणीकरण अभी तक नहीं हुआ है। उन्हें नि:शुल्क यूनिफॉर्म और स्टेशनरी आदि के लिए मिलने वाले 12 सौ रुपये के लिए अभी इंतजार करना होगा। डीबीटी के जरिए सिर्फ उन्हीं बच्चों के अभिभावकों के खाते में राशि भेजी गई है जिनका आधार प्रमाणीकरण हो चुका है। आंकड़ों में मुताबिक फिलहाल करीब एक तिहाई बच्चों का ही आधार प्रमाणीकरण हो पाया है।
जनपद के 2269 परिषदीय विद्यालयों में लगभग साढ़े तीन लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। विभाग का दावा है कि इनमें से एक लाख दस हजार 749 बच्चों का आधार प्रमाणीकरण हो चुका है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इसके बाद छूटे करीब दो लाख 40 हजार बच्चों के आधार तेजी से प्रमाणित कराए जा रहे हैं। प्रमाणीकरण कराए जाने के बाद ही अगले चरण में शेष बच्चों के अभिभावकों के खाते में धनराशि भेजी जाएगी। जिला समन्वयक समेकित शिक्षा अनुपम गुप्ता ने बताया कि आधार प्रमाणीकरण की व्यवस्था राशि आवंटन व छात्र संख्या पुख्ता करने के लिए की जा रही है। जिससे किसी छात्र का दो विद्यालय में नाम लिखाकर फर्जीवाड़ा न किया जा सके।
जनपद के परिषदीय विद्यालयों के एक लाख दस हजार 749 बच्चों के आधार का प्रमाणीकरण कराया जा चुका है। शेष बच्चों के आधार सत्यापन का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। जिसके पूरा होने के बाद उनके यूनिफार्म की धनराशि अगले चरण में डीबीटी के जरिए उनके अभिभावकों के खाते में भेज दी जाएगी। -हेमंत राव, बीएसए
कईं अभिभावकों ने अब तक नहीं बनवाए आधार
ऐसे बच्चे जिनका आधार कार्ड अभी तक नहीं बना है। उनका आधार कार्ड बनवाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने ब्लाक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) पर व्यवस्था कर दी है। लेकिन हालत यह है कि एक दिन में 20-25 से अधिक आधार कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में सबसे अधिक समस्या उन अभिभावकों को हो रही है। जो ग्रामीण इलाके से आते हैं। क्योंकि ऐसे लोग कभी कभी बीआरसी पर जब अधिक भीड़ हो जाने पर घर वापस लौट जाते हैं, तो कईं कईं दिनों तक आधार बनवाने जाते ही नहीं हैं। इस कारण कईं स्थानों पर आधार प्रमाणीकरण के अपेक्षित परिणाम नहीं आ पा रहे हैं।