बहरियाबाद। क्षेत्र के मखदूमपुर स्थित मदरसा दारूल उलूम मखदूमिया के परिसर में सरकार मखदूम कांफ्रेंस एवं जश्न-ए-दस्तार हिफ्ज आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न जिलों एवं राज्यों से आए ओलमा-एकराम ने दीनी एवं इस्लाही बातों को अपनी तकरीर का मौजू बनाते हुए जलसे को खेताब फरमाया। शोअरा-एकराम ने हम्द , मन्कबत एवं नातिया कलाम पेश किया। जलसे की शुरूआत हाफिज एवं कारी इमामुद्दीन एवं हाफिज अशरफ रजा ने तिलावते-कुरआनपाक से किया। हाफिज-ए-कुरआन बन चुके मदरसा के पांच छात्रों की दस्तारबंदी की गई। जलसे को खेताब फरमाते हुए बरेली से आए मौलाना मुफ्ती मुहम्मद कासिम ने कहा कि इस्लाम में दिल-आजारी के लिए मनाही है। जो भी किसी को तकलीफ पहुंचाता है वह मोमिन हो ही नहीं सकता। कुरआनपाक हमें अमन, मिल्लत और इंसानियत का पैगाम देता है, जिस पर अमल करना हमारा फर्ज है। इत्तहाद (एकता) जिंदगी है और इख्तलाफ मौत होती है। मौलाना सैयद शबाअत हुसैन ने मोआशरा में फैल रही बदउनवानियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमारी नई नस्ल को गुमराह होने से बचना चाहिए। इन्हें बर्मा, पाकिस्तान, इराक आदि मुल्कों की खस्ताहाली एवं बदहाली से सबक लेकर दीन के रास्ते पर चलना चाहिए। मौलाना जकीउल्लाह जंगीपुरी ने वालिदैन (माता-पिता) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो अपने वालिदैन का चेहरा एक बार मुहब्बत से देख ले तो उसे एक हज-ए-मकबूल का सवाब मिल जाता है। अरमान रजा, शादाब साकी, सआदत हुसैन, इस्लाम गाजीपुरी, मसऊद रजा, जीशान रजा ने हम्द, नातिया कलाम, मन्कबत आदि पेश किए। मुफ्ती अब्दुल मोबीन नोमानी, मौलाना मुजीबुल्लाह, कारी माहताब, कारी शकील अहमद एवं मौलाना सद्दाम आदि ने हाफिज-ए-कुरआन बन चुके पांच छात्रों सलमान, माहताब, तौसीफ, मिसबाहुलहक, इरशाद की दस्तारबंदी की। इस मौके पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शहजाद अहमद, मैनुद्दीन, आजाद अहमद, मुहम्मद यासीन, महफूज आलम, शहाबुद्दीन अंसारी, फायक हसन आदि मौजूद रहे। नेजामत कैसर आजमी एवं सदारत कारी माहताब अहमद ने किया। अंत में नाजिम-ए-आला मुमताज अहमद ने आभार व्यक्त किया।