बिरनो। सीआरपीएफ के जवान श्यामनारायण यादव दिसंबर माह में छुट्टी पर घर आए थे। परिवार के साथ खुशियां बांटते हुए 20 दिसंबर को ड्यूटी के लिए घर से रवाना हुए थे। उन्होंने परिवार से वादा किया था कि अगर छुट्टी मिली तो वह होली परिवार के साथ मनाएंगे। इसी बीच आतंकवाद को लेकर भारत-पाक के बीच जंग छिड़ गई। इससे परिवार के लोग बार-बार फोन कर श्यामनारायण का हाल-चाल लेते थे। पहली मार्च को बड़े बेटे अरविंद यादव ने पिता श्यामनारायण से फोन पर वार्ता कर मौजूदा हालात के संबंध में जानकारी ली थी। इसी रात परिवार के लोगों को जैसे ही यह सूचना मिली कि श्यामनारायण गोली लगने से घायल हो गए हैं, उनकी चिंता बढ़ गई थी। परिजनों के साथ ही पास-पड़ोस के लोग ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करने लगे थे, लेकिन शायद ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था। जम्मू में स्थित सेना के अस्पताल में शनिवार की रात जांबाज ने अंतिम सांस ली, जिससे जवान के सकुशल घर वापसी की आस टूट गई। श्यामनारायण की मौत से परिवार के लोग दुखी जरूर थे, लेकिन इस दुख के बीच लोगों को इस बात का भी फख्र था कि उन्होंने अपनी जिंदगी भारत माता के लिए न्यौछावर कर शहीदों की सूची में अपना नाम दर्ज कराते हुए जिले को गौरवान्वित किया।