पुलिस ने ऐसे हाईवे लुटेरे गैंग के तीन बदमाशों को पकड़ा है, जो बड़े और नए वाहन लूटते थे। लूटे गए वाहनों के चेसिस नंबर बदलकर उनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें एक नंबर में बेचते थे। गैंग लीडर एचआईवी पॉजिटिव है, जिसे उसके दो अन्य साथियों के साथ पुलिस ने दबोचा है। इनमें एक एलएलबी किया हुआ है, जो नौकरी न मिलने पर लुटेरा बना। इनसे तीन ट्रक, एक कंटेनर और तीन लग्जरी कारें बरामद की हैं, जो राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, गाजियाबाद और बागपत से लूटे थे।
इनका रजिस्ट्रेशन बागपत और हरियाणा में कराया जाता था। खास बात यह भी है कि लुटेरे शोरूम से निकलने वाली गाड़ियों पर नजर रखते थे और मौका मिलते ही हाईवे पर उसे लूट लेते थे।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राजेश पांडेय ने दावा किया कि पकड़े गए लुटेरों में एक एचआईवी पॉजिटिव निवासी बागपत है, दूसरा शेखर निवासी मुरादनगर है, जो एलएलबी कर चुका है। तीसरा शेखर का चाचा बृजेश है, जो प्रॉपर्टी डीलर है, इसका हाथ टूटा हुआ है। इन्हें मसूरी में नहर पुल के पास से एक सूचना पर चेकिंग के दौरान दबोचा गया।
शेखर के खिलाफ कई राज्यों में वाहन चोरी और लूट के केस दर्ज हैं। बृजेश के नाम पर 15 लग्जरी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। शेखर ने पुलिस को बताया कि उसने एलएलबी किया हुआ है। नौकरी न मिलने और जल्दी पैसे कमाने की चाह में वह लुटेरा बन गया। बृजेश ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग करता है। बाजार में काम न होने पर वह इस गैंग में शामिल हुआ।
ऐसे करते थे वारदात
एसपी रूरल ने बताया कि नेशनल हाईवे पर लूटे गए वाहनों से ओवरटेक कर वाहनों को लूटते थे। सबसे पहले गाड़ियों के चेसिस नंबर बदलकर उन्हें बागपत और हरियाणा के आरटीओ कार्यालय में उनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर एक नंबर में उन्हें लाखों रुपये में बेचते थे।
लुटेरों ने बताया कि वह गाड़ियों के चेसिस नंबर के साथ ज्यादा हेराफेरी नहीं करते थे। वह केवल गाड़ी के चेसिस नंबरों में से 1,3,5, और 7 में से केवल एक नंबर के साथ ही हेराफेरी करते थे जैसे 1 को 7 बनाना, 3 को 8 बनाना, 5 को 8 बनाना और 7 को 9 बनाने से ही पूरे चेसिस नंबर बदल जाता था।
शोरूम पर भी खड़ा रहता था गिरोह का एक सदस्य
आरोपियों ने बताया कि वह लोग अक्सर नई गाड़ियों को ही अपना शिकार बनाते थे। उनके गिरोह का एक सदस्य शोरूम के बाहर से बताता था कि यह नई गाड़ी अभी निकली है।
10 सदस्य हैं गैंग में
पुलिस ने बताया कि गैंग में 10 से ज्यादा सदस्य हैं, जिनमें अधिकांश शारीरिक रूप से कमजोर हैं।