शहर के 50 हजार से अधिक दुकान-मकान खरीदारों की रजिस्ट्रियां अटक गई हैं। शहर के 50 से अधिक बिल्डरों ने जीडीए की बकाया किस्तों का भुगतान नहीं किया है। जब तक बिल्डर जीडीए को बकाया भुगतान नहीं कर देते, इनके प्रोजेक्ट्स में संपत्तियां खरीदने वाले बिल्डर को पूरी किस्तें चुकाने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं करा सकेंगे।
जीडीए ने बिल्डरों को कई बार बकाया जमा करने का नोटिस भेजा है। रीयल एस्टेट सेक्टर में मंदी के चलते बिल्डर पैसा जमा करने की बजाय और समय मांग रहे हैं। बदले में वह पेनाल्टी चुकाने पर राजी हैं।
प्रापर्टी के जानकारों के मुताबिक एक बिल्डर अमूमन एक हजार फ्लैट-कामर्शियल स्पेस का प्रोजेक्ट लाता है। इस लिहाज से यदि 50 से अधिक बिल्डर डिफाल्टर हैं तो इतनी ही संपत्तियों की सेल डीड नहीं हो सकेगी।
जीडीए वीसी विजय यादव के मुताबिक जीडीए के 50 बड़े बकायेदार बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। इन संपत्ति मालिकों पर जीडीए का 300 करोड़ से अधिक रुपया बकाया है। बकाएदारों को 15 दिनों के भीतर धनराशि जमा कराने का नोटिस जारी किया गया है।
जीडीए अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि जीडीए बिल्डरों को सेल एग्रीमेंट के आधार पर प्लाटों की बिक्री करता है। जब तक बिल्डर प्राधिकरण की बकाया धनराशि नहीं चुका देता, नियमानुसार वह अपने प्रोजेक्ट की सेल डीड (रजिस्ट्री) नहीं करा सकता है।
बकायेदारों में 60 फीसदी संख्या कामर्शियल प्रापर्टी लेने वालों की है। फेडरेशन ऑफ एओए के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि जब तक बिल्डर जीडीए का बकाया नहीं चुकाएंगे, उन्हें डीओडी और कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। इसके बिना किसी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकेगी। हजारों फ्लैट खरीदार अपने हक के लिए परेशान होंगे।