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पत्नी को मुआवजा राशि के साथ मिलेगी पेंशन

Sun, 27 May 2018 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कमरों के भीतर आराम फरमाते मजदूर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सजेती स्थित पावर प्लांट में बीमारी से मरे मजदूर की पत्नी को निर्माण कंपनी ने मुआवजा राशि देने के साथ ही चार हजार रुपये मासिक पेंशन देने का वादा किया है। वादे के बाद मजदूरों को गुस्सा कम हुआ और उन्होंने दोबारा काम शुरू करने की हामी भरी है। वहीं, मजदूर के शव को पोस्टमार्टम कराने के बाद उसके पैतृक गांव भेजा गया है। साथी मजदूरों ने बताया कि उसका अंतिम संस्कार और रीति-रिवाज पूरी होने के बाद काम शुरू कर देंगे।
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घटनाक्रम के अनुसार सजेती क्षेत्र की यमुनापट्टी में बन रहे 1980 मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट में काम करने वाले बिसनपुर, डहरा, कटिहार गुरू बाजार (बिहार) निवासी मजदूर प्रमोद मंडल की बीते शुक्रवार की भोर में बीमारी से मौत हो गई थी। वह पावर प्लांट निर्माण कंपनी नेयवेली की सहायक इकाई बीजीआर एनर्जी सिस्टम में दिहाड़ी मजदूर था। इसी बीच किसी ने अफवाह फैला दी कि कंपनी के लोगों ने प्रमोद का शव गायब कर दिया है। जिससे साथी मजदूर भड़क गए। उन्होंने बीजीआर कंपनी के आफिस में पथराव और तोड़फोड़ कर दी। हालात बेकाबू होते देख जिले के 10 थानों के पुलिस बल और पीएसी के साथ पड़ोसी जनपद हमीरपुर से अपर पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में कई थानों का फोर्स पावर प्लांट पहुंच गया। कानपुर के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह और एसएसपी अखिलेश कुमार भी मौके पर पहुंचे।
शुक्रवार की देरशाम डीएम और एसएसपी पावर प्लांट क्षेत्र से वापस कानपुर लौट गए। जबकि, स्थिति की निगरानी के लिए एसडीएम और सीओ (घाटमपुर) को जिम्मेदारी सौंपी गई। अधिकारियों के निर्देश पर तीन थानों का पुलिस बल और पीएसी तैनात है। घाटमपुर सीओ आरके चतुर्वेदी ने बताया कि अब स्थिति सामान्य है।
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 उपजिलाधिकारी राहुल कश्यप विश्वकर्मा ने बताया कि पावर प्लांट में हुई मजदूर की मौत के मामले में संबधित कंपनी बीजीआर के अधिकारियों और मजदूरों के प्रतिनिधि मंडल के बीच वार्ता कराई गई। कंपनी के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को नियमानुसार सात लाख रुपये का मुआवजा और उसकी पत्नी को चार हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के साथ समय-समय पर लागू होने वाले भत्ते प्रदान करने की बात तय की है।

मजदूरों ने बंद रखा काम
  साथी मजदूर की मौत के मामले को लेकर बिहार के मजदूरों ने शनिवार को पावर प्लांट में काम बंद रखा।  बताया कि वह लोग साथी का अंतिम संस्कार हो जाने के बाद ही काम शुरू करेंगे। प्रमोद मंडल के साथियों अनंत झा, मुकेश, मनटुन मंडल और साधू सिंह ने बताया कि बिहार में रिवाज है कि एक साथ रहने और काम करने के दौरान किसी साथी की मौत हो जाती है तो उसका अंतिम संस्कार होने तक अन्य लोग कामकाज नहीं करते हैं। प्रमोद  मंडल का शव पोस्टमार्टम के बाद उसके घर भेजा गया है। जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाना है। इधर, बिहार के मजदूरों के ज्यादातर आवासों में सन्नाटा जैसा पसरा दिखा। कमरों के भीतर दो-चार मजदूर अपने ठिकानों पर आराम फरमाते दिखे। जबकि, कुछ कमरों के बाहर चहलकदमी करते घूम रहे थे।
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