सात जन्मों तक साथ जीने और साथ मरने की कसमें निभाने की बातें अक्सर सुनने को मिलती है। विवाह के दौरान भी नवयुगल जीवनभर साथ निभाने का संकल्प अग्नि के समक्ष लेते हैं।
शनिवार को मैथा तहसील के गांव मदारपुर गाजीउद्दीन में यह कहावत चरितार्थ हुई। जब गांव के ही वृद्ध प्रताप सिंह ने पत्नी की मौत के साथ ही स्वयं प्राण त्याग दिए। वृद्ध दंपति की असामयिक मौत पर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण पति-पत्नी के बीच प्रगाढ़ प्रेम की चर्चा करते सुने गए।
शनिवार को मैथा तहसील के गांव मदारपुर गाजीउद्दीन निवासी प्रताप सिंह उर्फ बोड़े सिंह (80) की पत्नी रामदेवी (75) को शुक्रवार शाम तेज बुखार होने पर उनके लड़के महेंद्र सिंह, नरेंद्र व प्रमोद ने जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। बीती देर रात रामदेवी की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। मां का शव लेकर पुत्र गांव मदारपुर गाजीउद्दीन पहुंचे।
रामदेवी की मौत पर पति प्रताप सिंह ने घर वालों से गंगाजल व तुलसी दल खाने के लिए मांगा। इसका सेवन करने के आधा घंटे बाद प्रताप के भी प्राण निकल गए। पलक झपकते ही वृद्ध दंपति की मृत्यु पर लोग अचम्भे में पड़ गए। वृद्ध दंपति की मौत गांव में चर्चा का विषय बनी रही।
ग्रामीण प्रताप उर्फ बोड़े और उनकी पत्नी रामदेवी के बीच प्रगाढ़ प्रेम को लेकर चर्चा करते देखे गए। एक साथ घर में दो बुजुर्गों की मौत से घर में कोहराम मच गया। इस हादसे से गांव में भी शोक छा गया है। इधर मदारपुर गाजीउद्दीन व आसपास के गांवों के लोगों ने जब इस घटना के बारे में सुना तो शोक संवेदना व्यक्त करने शोक संतप्त परिवारीजनों के बीच पहुंचे।
प्रगाढ़ प्रेम था मृत वृद्ध दंपति के बीच- ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव, लाल सिंह, बउवा बाजपेई, मुनेराज, पंकज यादव आदि ने बताया कि इस तरह की घटना से सब आश्चर्य चकित हैं। नातिन बबली, सपना, बहू मुनेराज, गिरजा, मुन्नी ने बताया कि अम्मा बाबू के बीच बहुत प्रेम था।
अश्रुपूर्ण नेत्रों से दी वृद्ध दंपति को अंतिम विदाई- पति-पत्नी की एक साथ मौत के बाद गंगा के बिठूर घाट पर उनका अंतिम संस्कार नम आंखों के साथ किया गया। दोनों की चिताएं अगल-बगल में सजाई गईं।
मृतक दंपति के बेटे महेंद्र, नरेंद्र, प्रमोद ने बताया कि अम्मा और बाबू आपस में कहा करते थे कि शादी के समय जो वादे रामदेई से किए हैं। वह मरते दम तक निभाएंगे, जबकि अम्मा रामदेवी कहा करती थीं कि वह बाबू से पहले ही मरेंगी।