सेमिनार में बोलते आईआईटी (कानपुर) के प्रो.हरीश चंद्र वर्मा।
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प्राथमिक स्तर से लेकर उच्चस्तर तक की शिक्षा में अन्वेषण के माध्यम से सुधार की अति आवश्यकता है। इसके लिए विषयवस्तु को सरल और सुरुचिपूर्ण बनाया जाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रही जटिलताओं को भी कम करना होगा। यह बातें सांखाहारी गांव स्थित श्री शक्ति डिग्री कालेज में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के समापन पर वक्ताओं ने कहीं।
आडीटर नेशनल अन्वेषिका नेटवर्क आफ इंडिया एवं आईआईटी कानपुर के प्रो. हरीश चंद्र वर्मा ने कहा कि शिक्षण प्रणाली का ढंग हमें प्रकृति से सीखना चाहिए। उन्होंने इसके लिए न्यूटन की खोज गुरुत्वाकर्षण का उदाहरण भी दिया। उन्होंने शिक्षक और छात्र के बीच भावनात्मक डोर का होना भी जरूरी बताया। कहा कि हम दिनोंदिन सुविधाभोगी बनते जा रहे हैं। हमारी प्रकृति और पृथ्वी अस्तित्व ही खतरे में पड़ता जा रहा है। कहा कि शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाते वक्त छात्रों की काउंसलर की भूमिका में होना चाहिए।
राजस्थान से आए डा. एके श्रीवास्तव ने विज्ञान शिक्षण के कई दृश्य और श्रव्य प्रयोग करके दिखाए। उन्होंने जल और मिट्टी में घुलनशील पालिथिन पर चल रहे शोध और प्रयोगों के बारे में भी जानकारी दी। वहीं, जामिया मिलिया इस्लामियां विश्वविद्यालय नई दिल्ली से आए प्रो.एहरार हुसेन ने बताया कि एक्शन रिसर्च के माध्यम से टीचिंग की विभिन्न समस्याओं का हल किया जा सकता है।
हिमांचल प्रदेश विश्वविद्यालय (शिमला) के प्रो.रोमेश चंद्रा और प्रो.आशुतोष शर्मा समेत कई अन्य शिक्षाविदों ने विचार व्यक्त किए। कालेज के प्रबंधक विनय त्रिवेदी ने सेमिनार के समापन पर सभी का आभार प्रदर्शन किया। सेमिनार का संचालन डा.संदीप त्रिपाठी ने किया।