यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से सेंगुर नदी में भी पानी का दबाव बढ़ने लगा है। पानी से घिरे गांवों में राशन और चारे का संकट गहराया हुआ है। लोग अपने घरों से सामान समेटकर पलायन करने लगे हैं। बुधवार को एडीएम (प्रशासन) शिवशंकर गुप्ता और एसडीएम हरिहरराम ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया।
मालूम हो कि आढ़न, पथार, पड़ाव, कुंभापुर, कृपालपुर, रसूलपुर-भुरंडा, भरतौली, सिहारी, लवरसी, देवराहट, अहरौली घाट, मउदन, बम्हरौली घाट, सिमरिया, कट्टापुर्वा, मुसरिया, क्योंटरा बांगर, नगीना बांगर, हलिया समेत दो दर्जन गांवों का संपर्क सड़कों से टूट गया है। पथार गांव के कई घर पानी से घिर गए हैं। ग्राम पंचायत चपरेहटा के मजरा किशवा-दुरौली में भी गांव की सरहद तक पानी पहुंच गया है।
पथार के रमेशचंद्र, मनोज कुमार, रज्जो देवी, प्रीतम सिंह कहा कि प्रशासन की ओर से आवागमन के लिए छोटी नावें तो चलवा दी गई हैं, लेकिन सरकारी मदद के नाम पर कुछ नहीं मिला है। हजारों बीघा फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
बाढ़ शरणालयों में सुविधाओं का अभाव है। पानी से घिरे गांवों में बीमारी फैलने के आसार बने हैं। एसडीएम ने बताया कि कोटेदारों को गांव में रहकर लोगों के लिए राशन और खाने के लिए तैयार भोजन का बंदोबस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि लेखपालों द्वारा भी रोजाना हालात पर नजर रखी जा रही है।