कसबे के गढ़ीमहेरा गांव में विकास न होने के मुद्दे पर मतदान बहिष्कार कर रहे ग्रामीणों ने शुक्रवार को पल्स पोलिया ड्राप पिलाने गई टीम को दौड़ा लिया। बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने से इंकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के समझाने के बावजूद ग्रामीण नहीं माने। बाद में गांव पहुंचे एसडीएम के आश्वासन पर ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का फैसला वापस लिया।
रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र के पांच सौ आबादी वाले गढ़ीमहेरा गांव के ग्रामीणों ने बिजली, सड़क, जलनिकासी, विधवा पेंशन आदि मांगों पर 24 जनवरी को गांव के बाहर बैनर लगाकर मतदान बहिष्कार करने का ऐलान किया था। गांव में कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था। जिससे ग्रामीण खासे नाराज थे।
रविवार को सुनाथा गांव में लगे पोलियो बूथ पर गढ़ीमहेरा गांव का एक भी बच्चा दवा पीने नहीं पहुंचा था। शुक्रवार को सुपरवाइजर मधू शुक्ला, आशा शारदा, पद्मा देवी व सुमन देवी के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने दौड़ा लिया। टीम ने भाग कर अपने आप को बचाया, और सूचना सीएचसी अधीक्षक को दी। गांव पहुंचे सीएचसी अधीक्षक डा. सिद्धार्थ पाठक व स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी जयकिशन ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं माने। स्वास्थ्य अधिकारी वापस आ गए।
एसडीएम डेरापुर सुरजीत सिंह, सीओ डेरापुर माजिद अब्सार, बीडीओ ज्ञानेंद्र मिश्रा ने ग्रामीणों को चुनाव बाद विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार वापस ले लिया। ग्रामीण रामबाबू, नरेंद्र पाल, विवेक त्रिपाठी, शमीम, रशीद, नंदराम, शिवकुमार, रामबाबू, आदि ने बताया कि अधिकारियों ने विकास कार्य कराने का भरोसा दिया है। ग्रामीणों ने बैनर हटा दिया है, और वह मतदान में हिस्सा लेंगे।
एसडीएम सुरजीत सिंह ने बताया कि गांव वालों ने मतदान बहिष्कार का फैसला वापस ले लिया है। सीएचसी अधीक्षक डा. सिद्धार्थ पाठक ने बताया कि शनिवार को दोबारा टीम को भेजकर बच्चों को दवा पिलाई जाएगी।