कसबा स्थित कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर के दोनों तालाब भीषण गर्मी में सूखे पड़े हैं। जिससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं में निराशा है। वहीं पानी न होने से मंदिर परिसर में निवास करने वाले जीव-जन्तु प्यास से बेहाल होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि वर्ष में दो बार (नवरात्र) पर्व के मौके पर एक तालाब में पानी भरवाया जाता है।
दुर्गा सप्तशती और देवी भागवत पुराण में कूष्मांडा देवी का वर्णन चौथी अधिष्ठात्री देवी के रूप में मिलता है। प्राप्त इतिहास के मुताबिक कूष्मांडा देवी का प्रदेश में एकमात्र मंदिर घाटमपुर कसबे में है। मंदिर परिसर में दो पक्के तालाब (कुंड) हैं। इनमें एक का उपयोग भक्तों के नहाने के लिए जबकि, दूसरे के जल का उपयोग देवी मंदिर की धुलाई-सफाई करने और देवी मूर्ति को नहलाने के लिए किया जाता रहा है।
कसबा निवासी मुन्नूलाल स्वर्णकार, कोटद्वार निवासी पुत्तन शुक्ला, रामनरायण पांडेय, राजेंद्र सैनी, विनय मिश्रा, राधे बिहारी ओमर, राजकुमार तिवारी और रामऔतार गुप्ता ने बताया कि बीते पंद्रह वर्ष पहले तक मंदिर परिसर के दोनों तालाब पानी से लबालब भरे रहते थे। कानपुर-सागर राजमार्ग के विस्तारीकरण के बाद तालाब में बारिश का पानी पहुंचने के रास्ते बंद हो गए। जिसके चलते पानी के अभाव में दोनों तालाब नवंबर-दिसंबर में ही सूख जाते हैं। जबकि, जून के महीने में दोनों तालाबों में पानी की एक बूंद भी नहीं है। देवी मंदिर में रोजाना दर्शन करने आने वाले भक्तों ने बताया कि जब कभी मई-जून के महीनों में तालाबों में पानी कम हो जाता था तो भदरस रजबहे से भरवा दिया जाता था। बताया कि पानी बीरपुर गांव के पास स्थित रजबहे के कुलाबे से होकर आता था। बताया कि एक दशक से रजबहे में ही पानी का अकाल है वहीं, किसानों ने कुलाबे की नाली को भी खत्म कर दिया है। जिससे तालाब तक पानी पहुंचने का सवाल ही नहीं उठता है।
...तालाबों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र
घाटमपुर। आस्था से जुड़े कसबे के कूष्मांडा देवी मंदिर के सूखे तालाबों में पूरे वर्ष पानी बना रहे इसकी व्यवस्था की जा रही है। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी विमलापति ने बताया कि पालिका क्षेत्र में पेयजल योजना के तहत लगाए गए एक नलकूप का पानी देवी मंदिर के तालाबों तक पहुंचाने के लिए योजना तय की गई है। रामसारी रोड तिराहे पर लगे नलकूप की पाइप लाइन तालाबों तक डलवाई गई है। बताया कि जलनिगम से हैंडओवर होते ही तालाबों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू करवा दी जाएगी।