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बिना गड्ढे के बनवा दिए गए शौचालय

Fri, 28 Sep 2018 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गंगाराम के घर के बाहर बना शौचालय।
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भीतरगांव (घाटमपुर)। गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सरकारी धन पानी की तरह बहाया जा रहा है। लेकिन, नौकरशाही की कमीशनबाजी और जनता की उदासीनता से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने का नाम नहीं ले रही है। ग्राम पंचायत उदईपुर का हाल कुछ ऐसा ही है। जहां कई शौचालयों की गुमटी तो पहले बनवाकर खड़ी कर दी गईं। लेकिन, उनमें टैंक (गड्ढों) का निर्माण कराया ही नहीं गया है।
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स्वच्छ भारत मिशन के खंड प्रेरक विनीत निगम ने बताया कि गांव में कुल 150 शौचालय बने हैं इनमें सिर्फ 104 को प्रयोग में लाया जा रहा है। जबकि, 46 निष्प्रयोज्य पड़े हुए हैं। सुधा पुत्री रंगीलाल के नाम बनवाए गए शौचालय में सीट, छत, और गड्ढा कुछ भी नहीं है। गंगाराम और जगदीश के नाम बने शौचालयों में भी छत नहीं है, जिसके चलते संबंधित ग्रामीण खुले में शौच करने जा रहे हैं।

  गांव निवासी रामदुलारी विश्वकर्मा ने बताया कि उसके घर के बाहर बने शौचालय में न तो छत पड़ी है और न ही सीट लग पाई है। वृद्ध जगदीश यादव ने बताया कि उनको शौचालय बनवाने के लिए जितना ईंटा और सीमेंट मिला था सब लगवा दिया। लेकिन, उससे निर्माण पूरा नहीं हो पाया जिसके चलते अभीतक अधूरा पड़ा है।
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इधर, ग्राम पंचायत उदईपुर निवासी सुरेश यादव, रामसिंह और ज्ञानसिंह के घरों के बाहर बने शौचालयों को देखकर आप सोचने के लिए मजबूर हो जाएं। शौचालयों की गुमटी  बनी है और छत भी पड़ी है। लेकिन, उनमें गड्ढे (टैंक) बनाए ही नहीं गए हैं। सभी परिवार खुले में शौच करने जाते हैं। गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक सोबरन सिंह ने बताया कि नौकरशाही में धन के बंदरबांट के चलते शौचालय के धन का दुरुपयोग किया गया है जिससे गांव में तकरीबन 50 शौचालय अपूर्ण पड़े हुए हैं।
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