अक्तूबर माह में कच्छ (गुजरात) के जखऊ बंदरगाह में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के पास मछली पकड़ते समय पाक सुरक्षा एजेंसी के पकड़कर ले गए मछुआरों के रिहाई की उम्मीद जगी है।
दो दिन पहले भीतरगांव क्षेत्र के मोहम्मदपुर नर्वल गांव निवासी मछुआरों के परिजनों के पास पाकिस्तान से पत्र पहुंचा तो उनमें आशा की किरण जागी है।
बता दें कि 15 अक्तूबर को घटनाक्रम में पाक सुरक्षा एजेंसी के जवानों ने 27 भारतीय मछुआरों को पकड़ लिया था। इनमें तीन कानपुर नगर के भीतरगांव कस्बे के मोहम्मदपुर नर्वल गांव निवासी मछुआरे जयचंद्र पुत्र गंगाप्रसाद गौड़, रविशंकर पुत्र बुद्धीलाल गौड़ और संजयदत्त पुत्र रामप्रताप कुरील भी हैं।
अमर उजाला से इनके परिजनों ने बताया कि उनकी रिहाई की उम्मीद छोड़ चुके थे। फिर भी उन्होंने क्षेत्रीय विधायक और सांसद के साथ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी।
जयचंद्र के भाई प्रभूदत्त गौड़ ने बताया कि 28 जनवरी को पाकिस्तान से एक पत्र आया। जिसको खोलने पर गांव के तीनों युवकों द्वारा लिखी गई अलग-अलग चिट्ठियां निकलीं। बताया कि वह लोग पाकिस्तान की मलीर लांदी जेल में बंद होने के साथ सकुशल हैं।
सभी को एक बैरक में रखा गया है। पत्र 6 जनवरी को भेज गया है। पत्र में युवकों ने घरों से आधार कार्ड और राशन कार्डों की फोटो कापी के साथ दो-दो फोटो भेजने को लिखा है। यह भी लिखा है कि पत्र का जवाब जरूर भेजें, जिससे पता चल सके कि उनका पत्र पहुंच गया है।