इंजीनियरों की हड़ताल किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। हड़ताल के चलते शनिवार को भी मंसुरा गांव के पास घाटमपुर रजबहे से कटी खांदी तीसरे दिन भी नहीं बांधी गई। इससे पांचों गांवों की सड़कों सहित घरों के सामने लबालब पानी भरा रहा। वहीं सैकड़ों बीघा धान, आलू, लाही सहित अन्य फसलें पानी से पूरी तरह डूबी रही।
बताते चलें कि पिछले कई दिनों से इंजीनियरों की हड़ताल के चलते मंसुरा गांव के समीप घाटमपुर रजबहे की शनिवार से कटी खांदी सोमवार को भी नहीं बांधी जा सकी। हालांकि रजबहे की पानी रुकवा देने से खेतों में जलस्तर बढना बंद हो गया। लेकिन रहीमपुर, उमरन, संतोष का पुरवा, रामदीन का पुरवा, बिलई गांवों की गलियां पानी से जलमग्न रही। इसके चलते लोगों को आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ी। वहीं रजबहे की खांदी से पानी की चपेट में आई करीब 300 बीघा धान, आलू, लाही सहित अन्य फसलों के अब सडने का खतरा बढ़ गया है।
किसान खेतों में मेड़बंदी कर फसलों में जाने से रोकने का प्रयास करते रहे। किसान कुंवरलाल, हरदेव सिंह, रामविलास आदि ने बताया कि रजबहे से पानी का बहाव बंद होने के बावजूद खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। तीन दिनों से लगातार भरा पानी पकी धान की फसल को बर्बाद कर देगा। वहीं उग रही आू की पौध भी सड़ जाएगी।