पटना-इंदौर एक्सप्रेस पटरी से क्या उतरी कि कुछ लोगों की जिंदगी ही पटरी से उतर गई। हादसे में किसी की किताब खुली रह गई तो किसी के लिए मौत के सफर की वो आखिरी रोटी बन गई। ये तस्वीरें शायद कुछ यही बयां कर रहीं हैं।
हादसे के चार दिन बाद बुधवार को घटनास्थल पर कुछ अलग ही नजारा दिखाई दिया। घटना वाले दिन वहां लोगों की भीड़ थी, लेकिन बुधवार को सन्नाटा था। बिखरा हुआ यात्रियों का सामान उनके कभी यहां मौजूद होने की गवाही देता नजर आया।
एसएससी की खुली पड़ी किताब के पन्ने शायद ही अब कोई ही पलटे क्योंकि उन्हें पढ़ने वाला कहां चला गया किसी को पता नहीं। कुछ यही हाल एक खुले टिफिन में रखी रोटियों का, जिन्हें खाने के लिए अब कोई नहीं बचा था।
यात्रियों का बिखरा हुआ खून से सना सामान हृदयविदारक हादसे की भयावयता बया कर रहा था। जब ट्रैक से ट्रेनें निकलती तो वहां का सन्नाटा जरूर टूटता। इन ट्रेनों मेें सफर करने वाले यात्री भी घटनास्थल के हालात देख सिहर उठे।
कानपुर देहात। पुलिस लाइन के एक कमरे में रखा यात्रियों का सामान अब अपनों के इंतजार में है। हादसे के बाद यात्रियों का छूटा सामान बैग, थर्मस, कंबल, शाल, सूटकेस, बच्चों के खिलौने, बर्तन आदि प्रशासन ने एकत्रित कराकर सुरक्षित रखवा दिए हैं। सामान को लेने के लिए अभी तक बहुत से लोग नहीं पहुंचे हैं।
आखिर यह सामान कब तक अपनों तक पहुंचेगा, यह किसी को नहीं पता है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अमरपाल सिंह ने बताया कि अधिकांश सामान को कानपुर हैलट भेजा गया है। जो सामान को लेने नहीं पहुंचा है। उसे दोबारा मंगाकर पुलिस लाइन माती में रखवाया जाएगा।