इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे की जांच कर रहे मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) पीके आचार्य ने बुधवार को दोबारा पुखरायां-मलासा के बीच दुर्घटनास्थल की छह घंटे जांच की। पटरियों में खामी नजर आने और सिग्नल के पहले लोड मालगाड़ी रोकने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। जांच के दौरान यह उनका तीसरा दौरा है। 19-20 दिसंबर को वह अपनी रिपोर्ट रेलवे मंत्रालय को देंगे।
सीआरएस ने दलेल नगर क्रासिंग से पुखरायां स्टेशन तक पटरी की नाप-जोख कराई। बीच में पटरी के नीचे का कुछ हिस्सा कमजोर दिखने पर सीनियर डीईएन संजय भगत को फटकारा। क्षतिग्रस्त स्लीपरों की गिनती और नाप कराई। इसी बीच कानपुर से आ रही मालगाड़ी सिगनल के पहले दुर्घटनास्थल पर खड़ी हो गई। झांसी से आ रही इंटर सिटी एक्सप्रेस को लूप लाइन पर खड़ा करने के बाद मालगाड़ी को निकाला गया।
सीआरएस ने सीनियर डीओएम श्रीकृष्ण शुक्ल को तलब कर फटकार लगाई। कहा कि लोड मालगाड़ी को इस तरह खड़ा करने से पटरी में जर्क आ सकता है। उन्होंने दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुए तीनों कोचों के पहियों की पैमाइश कराई। मुंबई वर्कशाप की टीम ने पहुंचकर ट्रेन में लगे अपने वर्कशॉप के पांचों कोचों का निरीक्षण किया।
छह घंटे पड़ताल के बाद सीआरएस शाम 5:30 पर दुर्घटनास्थल से रवाना हुए। रेलवे सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य शेख मोहम्मद ने बताया कि पुखरायां और मलासा के बीच अभी कॉशन लगाकर ट्रेनों को 30 किलोमीटर की रफ्तार से ही चलाया जा रहा है। जांच के दौरान झांसी के तत्कालीन डीआरएम एसके अग्रवाल, एडीआरएम विनीत कुमार सिंह, सीनियर डीएसटी टीए अंसारी, मैकेनिकल इंजीनियर नवेद तालिब, जोन के मुख्य संरक्षा अधिकारी एमपी सिंह, मंडल संरक्षा अधिकारी टीपी सिंह, डिप्टी सीओएम-सेफ्टी राजेश आदि अधिकारी मौजूद रहे।